कोरबा। सिटी बस सुविधा शुरू नहीं होने और बढ़ती आर्थिक तंगी के कारण स्कूली बच्चे डुमरडीह से रजगामार रोजाना पैदल ही स्कूल आने-जाने को मजबूर हैं। खासकर निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों के बच्चों के लिए यह समस्या गंभीर रूप लेती जा रही है। बच्चों का कहना है कि पहले सिटी बस चल रही थी। जिससे रियायत दर पर स्कूल से घर तक आवागमन हो जाता था, लेकिन वह सुविधा अब पूरी तरह बंद है। बच्चों को समय पर परिवहन सुविधा नहीं मिल पा रही है। वहीं दूसरी ओर ऑटो, ई-रिक्शा या निजी वाहनों का किराया वहन करना कई परिवारों के लिए संभव नहीं है। ऐसे में मजबूरीवश बच्चे पांच से छह किलोमीटर तक पैदल सफर कर रहे हैं। अभिभावकों ने बताया कि पहले सिटी बस सेवा कुछ हद तक राहत देती थी, लेकिन वर्तमान में यह सुविधा बंद है, जिसका शुरू होने का इंतजार किया जा रहा है। आर्थिक तंगी के कारण निजी साधन उपलब्ध कराना भी उनके लिए संभव नहीं है। इस स्थिति को लेकर अभिभावक और बच्चे प्रशासन से सिटी बस सेवा जल्द से जल्द शुरू करने की माँग कर रहे हैं, ताकि बच्चों को सुरक्षित और सुविधाजनक आवागमन मिल सके।
जंगली जानवर का रहता है खतरा
डुमरडीह से रजगामार के बीच घना जंगल है। जहां विभिन्न प्रजाति के वन्यप्राणियों की मौजूदगी रहती है। साथ ही क्षेत्र में हाथियों का विचरण भी होता है। ऐसी परिस्थिति में बच्चों का पैदल स्कूल आना जाना करना खतरे से खाली नहीं होता। साथ ही उक्त स्थल पिकनिक स्पाट भी है, जहां नशेड़ी व असमाजिक प्रवृत्ति के लोगों की मौजूदगी भी रहती है। ऐसे में छात्राओं के लिए सूनसान रास्ते पैदल स्कूल जाना अभिभावकों के लिए चिंता का सबब है।
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