कोरबा। एसईसीएल की कोयला खदानों से रिटायरमेंट के बाद कब्जा कर रहने वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को आवास नहीं छोड़ना पड़ेगा, यह बंधी उम्मीद अब टूटने लगी है। क्योंकि लगभग डेढ़ साल बाद भी सेवानिवृत्त कर्मियों को लीज पर आवास देने पर निर्णय नहीं हुआ है, जबकि कोल इंडिया के आवास सब कमेटी की तीन बैठकें हो चुकी है। इसी साल सितंबर में हुई बैठक में केन्द्र से अनुमति को जरूरी बताने पर सेवानिवृत्त कर्मियों को लीज पर आवास मिलने के मामले में पेंच – फंस गया है। अब माना जा रहा है कि यह ठंडे बस्ते में चला गया है। कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनियों में सेवानिवृत्त कोयला कर्मियों को आवासीय कॉलोनियों के मकान किराए या लीज एग्रीमेंट पर देने की योजना को अंतिम रूप देने कोल इंडिया की आवास सब कमेटी का गठन हुआ। कोल इंडिया के अधिकारियों व यूनियन प्रतिनिधियों को कमेटी में शामिल किया है, जो कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। डेढ़ साल पहले गठित कमेटी की तीन बैठक बैठकों के बावजूद सेवानिवृत्त कर्मियों को आवास देने पर निर्णय नहीं लिया है। इससे कब्जाधारी सेवानिवृत्त कर्मचारियों की चिंताएं बढ़ गई है। इनकी उम्मीदें कमेटी के गठन पर बंधी थी, लेकिन अब इन्हें आवास खाली करने की नौबत
आएगी, क्योंकि एसईसीएल के कई एरिया में कर्मचारियों के आवास आवंटन संबंधी आवेदन दफ्तरों में हैं। पेंडिंग हैं। खासकर कुसमुंडा एरिया में लगभग 150 कर्मचारी किराए के मकान में रहकर ड्यूटी कर रहे इनमें दूसरे एरिया से तबादले के बाद कुसमुंडा खदान में सेवाएं दे रहे हैं। जिले के कोरबा, गेवरा, दीपका व कुसमुंडा समेत दूसरे अन्य एरिया के एसईसीएल आवासीय कॉलोनियों के मकानों में 3566 सेवानिवृत्त कर्मियों का कब्जा है।
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