कोरबा। होली खेलने की तिथि को लेकर असमंजस की स्थिति है। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार होली का त्योहार 2 और 3 मार्च को मनाया जाएगा। पहले दिन यानी 2 मार्च सोमवार को होलिका दहन होगा, जबकि मंगलवार यानी 3 मार्च को धुलेंडी पर रंग खेला जाएगा। होलिका दहन 2 मार्च की शाम 6 बजे से रात 8:12 बजे के मध्य (प्रदोष काल में) करना श्रेष्ठ रहेगा। इस बार 3 मार्च को चंद्र ग्रहण भी रहेगा,3 मार्च को शाम 6.50 बजे पूर्णिमा तिथि समाप्त हो जाएगी, जबकि सूर्यास्त 6:25 बजे होगा। सूर्यास्त के बाद प्रदोष काल आता है, लेकिन तब तक पूर्णिमा खत्म हो चुकी होगी, इसलिए उस समय होलिका दहन संभव नहीं है। इससे होलिका दहन 2 मार्च की रात भद्रा पुच्छ में किया जा सकता है, जिसका समय 1.26 बजे से 2.38 बजे तक रहेगा। इस आधार पर धुलेंडी पर्व 3 मार्च को मनेगा। हालांकि राजस्थान व गुजरात जैसे राज्यों में सूर्यास्त देर से होता है और वहां सूर्यास्त के समय पूर्णिमा तिथि बनी रहती है, इसलिए वहां 3 मार्च को ही होलिका दहन कर सकते हैं। इसके अलावा 2 मार्च को शाम 5:56 बजे पूर्णिमा तिथि शुरू हो जाएगी, जो कि अगले दिन यानी 3 मार्च को शाम 6:50 बजे तक रहेगी, जबकि इस दौरान सूर्यास्त नहीं होगा। इसलिए प्रदोष काल भी लागू नहीं होगा। इससे होलिका दहन 2 मार्च सोमवार को ही करना श्रेष्ठ रहेगा। शास्त्रों में होलिका दहन फाल्गुन शुक्ल प्रदोष व्यापिनी पूर्णिमा को भद्रा रहित करना बताया गया है। इस बार फाल्गुन शुक्ल चतुर्दशी शाम 5:55 तक ही रहेगी। इसके बाद पूर्णिमा तिथि लग जाएगी। ऐसे में प्रदोष काल में पूर्णिमा 2 मार्च को ही होने से होलिका पर्व इसी दिन मनाना उचित रहेगा। इस दिन भद्रा शाम 5:56 बजे से अगले दिन मंगलवार सुबह 5:32 बजे तक रहेगी। इस बार 3 मार्च को उदय होता हुआ चंद्र ग्रहण भी दिखाई देगा, जिससे धुलेंडी पर्व पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
चंद्रग्रहण का प्रभाव नहीं, क्योंकि ग्रहण काल 18 मिनट ही रहेगा
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार धुलेंडी 3 मार्च मंगलवार को मनाई जाएगी। चंद्रग्रहण 3 मार्च को दोपहर बाद 3:20 बजे शुरू हो जाएगा ग्रहण का मोक्ष शाम 6:46 बजे होगा। इस दिन चंद्र उदय शाम 6:32 बजे और ग्रहण का समापन 6:46 बजे होगा, जिससे ग्रहण काल मात्र 18 मिनट का रहेगा। सूतक मंगलवार सुबह 6:20 बजे से लागू होगा। ग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र और सिंह राशि में बनेगा और भारत में दिखाई देगा। चंद्रग्रहण होने से होलिका दहन 2 मार्च को एक दिन पहले ही करना शुभ रहेगा। इसी तरह धुलेंडी 3 मार्च को मनाना श्रेष्ठ होगा।
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