कोरबा। इस साल 2 सूर्यग्रहण और 2 चंद्रग्रहण होंगे। इनमें से सिर्फ एक चंद्रग्रहण पूर्ण होगा, जो भारत में दिखाई देगा और उसका सूतक काल भी मान्य होगा। खास बात यह है कि यह चंद्रग्रहण होलिका दहन के दिन होगा। होली इस बार सिर्फ रंगों और गुलाल की नहीं होगी, बल्कि आकाश में घटने वाली एक दुर्लभ खगोलीय घटना भी एक दिन पहले रहेगी। 100 साल बाद होलिका दहन के दिन 3 मार्च को खग्रास चंद्रग्रहण रहेगा, जो दोपहर 3:20 बजे से शुरू होगा और शाम 6:47 बजे पूरा होगा। कुल अवधि 3 घंटे 27 मिनट की होगी। सूतक काल 9 घंटे पहले यानी सुबह 6:53 बजे से ही लग जाएगा। सनातन धर्म और शास्त्रों के अनुसार सूर्य और चंद्रग्रहण दोनों को ही एक अशुभ घटना के तौर पर देखा जाता है। ग्रहण काल में न तो शुभ-मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं और न ही देवी-देवताओं की पूजा होती है। फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लगने वाला ग्रहण ब्लड मून फाल्गुन पूर्णिमा के दिन लगने वाला चंद्रग्रहण सिंह राशि में लगेगा और साथ में केतु भी होंगे। इसी दिन होलिका दहन शाम 6:47 बजे के बाद ही किया जा सकेगा। होलिका दहन पर लगने वाले चंद्रग्रहण को ग्रस्तोदय ग्रहण, चंद्रमा खून की तरह लाल नजर आएगा, जिसे ब्लड मून भी कहा गया है।
1 दिन पहले ही खरीदनी होगी दहन की सामग्री
ज्योतिषाचार्य के अनुसार सुबह करीब 6:53 बजे से सूतक काल की शुरुआत होगी। इस दौरान शुभ कार्य, पूजा-पाठ वर्जित रहेंगे। ऐसे में एक दिन पहले या फिर ग्रहण काल के बाद दहन की सामग्री की खरीद कर सकेंगे। हालांकि सूखी सामग्री पर सूतक काल का कोई असर नहीं रहता है। उसके बावजूद शहरवासियों को खरीद करने से बचना चाहिए। यह चंद्रग्रहण पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र व सिंह राशि में घटित हो रहा है। अत: पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र व सिंह राशि वालों के लिए विशेष कष्टप्रद रहेगा।
3 घंटे 27 मिनट रहेगा ग्रहण
0 ग्रहण प्रारंभ दोपहर 3.20 बजे
0 खग्रास प्रारंभ दोपहर 4.35 बजे
0 ग्रहण मध्य शाम 5.04 बजे
0 खग्रास समाप्त शाम 5.33 बजे
0 ग्रहण समाप्त सायंकाल 6.47 बजे
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