कोरबा। जिले में नशे के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाने के लिए कलेक्टर कुणाल दुदावत की अध्यक्षता में जिला स्तरीय एनकॉर्ड समिति की बैठक हुई। बैठक में नशे की रोकथाम, जनजागरूकता और तंबाकू नियंत्रण को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए गए। शिक्षण संस्थानों को तंबाकू मुक्त बनाने, स्कूल-कॉलेजों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पाद बेचने वालों पर कार्रवाई करने और ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया। हालांकि, इस पूरी कवायद के बीच सबसे बड़ा सवाल शराबबंदी को लेकर खड़ा होता है।
सरकार की ओर से नशा मुक्ति अभियान चलाने की बात तो लगातार कही जा रही है, लेकिन शराब की बिक्री को लेकर पूर्ण प्रतिबंध की कोई स्पष्ट योजना फिलहाल नजर नहीं आती। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब शराब की बिक्री वैध रूप से जारी रहेगी, तो केवल जागरूकता अभियान और नशा मुक्ति केंद्रों के जरिए नशे पर प्रभावी अंकुश कैसे लगेगा?बैठक में कलेक्टर ने सभी विभागों को आपसी समन्वय से अधिकाधिक लोगों की सहभागिता सुनिश्चित करने और नियमित जागरूकता गतिविधियां संचालित करने के निर्देश दिए हैं। अब देखना होगा कि यह अभियान केवल बैठकों और जागरूकता कार्यक्रमों तक सीमित रहता है या नशे की उपलब्धता और अवैध कारोबार पर भी प्रभावी कार्रवाई के रूप में जमीन पर दिखाई देता है।
तंबाकू पर कार्रवाई, शराब पर चुप्पी क्यों?
एनकॉर्ड समिति की बैठक में स्कूल-कॉलेजों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री रोकने के लिए 100 गज के दायरे में कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। यह कदम निश्चित रूप से जरूरी है, लेकिन नशे की समस्या केवल तंबाकू तक सीमित नहीं है। शराब, गांजा, नशीली गोलियां और अन्य मादक पदार्थ भी युवाओं और समाज के लिए गंभीर चुनौती बने हुए हैं। ऐसे में अभियान की प्रभावशीलता इस बात पर निर्भर करेगी कि प्रशासन नशे के सभी स्वरूपों पर समान गंभीरता से कार्रवाई करता है या नहीं।
जागरूकता बनाम उपलब्धता का सवाल
नशे के खिलाफ जागरूकता फैलाना जरूरी है, लेकिन इसके साथ नशीले पदार्थों की आसानी से उपलब्धता पर रोक लगाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। यदि एक ओर लोगों को नशे से दूर रहने की सलाह दी जाए और दूसरी ओर शराब आसानी से उपलब्ध होती रहे, तो अभियान की वास्तविक सफलता पर सवाल उठना लाजिमी है। खासकर युवाओं को नशे से बचाने के लिए केवल जागरूकता कार्यक्रम पर्याप्त होंगे या नशे के स्रोतों पर भी सख्ती होगी, यह स्पष्ट होना बाकी है।
सरकार की शराब नीति पर भी हो स्पष्टता
प्रदेश में नशा मुक्ति को लेकर अभियान चलाने वाली सरकारी मशीनरी को यह भी स्पष्ट करना होगा कि शराब को लेकर उसकी नीति क्या है। क्या सरकार का लक्ष्य केवल लोगों को नशे से होने वाले नुकसान के प्रति जागरूक करना है या शराब की खपत को कम करने के लिए कोई ठोस नीति भी बनाई जा रही है? यदि शराबबंदी सरकार का लक्ष्य नहीं है, तो नशा मुक्ति अभियान के वास्तविक परिणामों को किस पैमाने पर मापा जाएगा, यह भी अहम सवाल है।
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