कोरबा। इस बार गणेशोत्सव सिर्फ धार्मिक दृष्टि से खास रहेगा। भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी 14 सितंबर (सोमवार) को भगवान गणेश की स्थापना होगी, जबकि 25 सितंबर (शुक्रवार) को अनंत चतुर्दशी पर मुख्य विसर्जन किया जाएगा। पंचांग के अनुसार चतुर्थी से चतुर्दशी तक कुल 11 तिथियां होती हैं, लेकिन अंग्रेजी कैलेंडर में यह उत्सव 14 से 25 सितंबर तक यानी 12 तारीखों में फैला रहेगा।
गणेशोत्सव की शुरुआत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी से होती है और समापन अनंत चतुर्दशी पर होता है। अब तिथियों को क्रम से देखें तो चतुर्थी-1, पंचमी-2, षष्ठी-3, सप्तमी-4, अष्टमी-5, नवमी-6, दशमी-7, एकादशी-8, द्वादशी-9, त्रयोदशी 10 और चतुर्दशी-11 यानी धार्मिक पंचांग के अनुसार गणेश चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक 11 तिथियां आती हैं। इसी कारण कई विद्वान गणेश स्थापना से विसर्जन तक की अवधि को 11 दिन बताते हैं। वहीं प्रचलन में इसे 10 दिवसीय गणेशोत्सव भी कहा जाता है, क्योंकि चतुर्थी के बाद दसवें दिन अनंत चतुर्दशी पर समापन होगा। गणेशोत्सव 10 दिवसीय पर्व कहा जाता है, लेकिन पंचांग का गणित कुछ अलग कहानी बताता है। चतुर्थी से अनंत चतुर्दशी तक क्रमश: चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी और चतुर्दशी मिलाकर कुल 11 तिथियां होती हैं। स्थापना और विसर्जन दोनों दिन जोड़ने पर भी भगवान गणेश 11 तिथियों तक भक्तों के बीच रहते हैं। हालांकि इस बार अंग्रेजी कैलेंडर में गिनती करें तो 14, 15, 16, 17, 18, 19, 20, 21, 22, 23, 24 और 25 सितंबर-कुल 12 तारीखें पड़ रही हैं। इसका कारण हिंदू पंचांग और अंग्रेजी कैलेंडर की दिन-गणना का अंतर है।
चतुर्थी 24 घंटे 38 मिनट की
भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी 14 सितंबर को सुबह करीब 7:06 बजे शुरू होगी और 15 सितंबर को सुबह करीब 7:44 बजे समाप्त होगी। यानी चतुर्थी तिथि लगभग 24 घंटे 38 मिनट तक रहेगी। गणेश चतुर्थी का पर्व 14 सितंबर को मनाया जाएगा। वहीं चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर रात करीब 11:18 बजे शुरू होकर 25 सितंबर रात करीब 11:06 बजे तक रहेगी। मुख्य विसर्जन 25 सितंबर को होगा।
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