यात्री बसों की नियमित सुरक्षा जांच में बरती जा रही कोताही
0 सैकड़ों बसों में सफर कर रहे हजारों यात्री, फिटनेस से लेकर ब्रेक-टायर तक की जांच जरूरी
कोरबा। स्कूल बसों की सुरक्षा को लेकर परिवहन विभाग साल में एक-दो बार जांच अभियान चलाता है, लेकिन जिले में रोजाना सैकड़ों यात्रियों को ढोने वाली यात्री बसों की नियमित और व्यापक सुरक्षा जांच उसी गंभीरता से होती नजर नहीं आ रही है। कोरबा से लोकल, लग्जरी और अंतरराज्यीय मार्गों पर बड़ी संख्या में बसें संचालित हैं। इनमें कुछ बसें दूसरे जिलों में पंजीकृत होने के बावजूद कोरबा होकर दूसरे राज्यों तक चलती हैं। ऐसे में बसों की फिटनेस और सुरक्षा व्यवस्था की नियमित निगरानी यात्रियों की सुरक्षा से सीधे जुड़ा मामला है।
जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक परिवहन का सबसे बड़ा सहारा बस सेवा ही है। कई क्षेत्रों में ट्रेन सुविधा सीमित है या उपलब्ध नहीं है। ऐसे में ग्रामीणों की शहर और अन्य इलाकों तक आवाजाही मुख्य रूप से बसों पर निर्भर है। लोकल बसें दिन में तीन से चार फेरे तक लगाती हैं, जबकि लंबी दूरी की बसें सामान्यत: एक फेरा पूरा करती हैं। यानी रोजाना बड़ी संख्या में यात्री इन बसों में सफर करते हैं। यात्री बसों में परमिट और फिटनेस की वैधता के साथ अग्निशमन यंत्र, प्राथमिक उपचार पेटी, आपातकालीन निकासी व्यवस्था, दरवाजे-खिड़कियां, टायर, ब्रेक और लाइट की स्थिति की नियमित जांच जरूरी है। किसी बस में छोटी तकनीकी खराबी भी चलते समय गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। लंबी दूरी की बसों में सुरक्षा उपकरण और लोकेशन ट्रैकिंग सिस्टम की उपलब्धता भी सुनिश्चित किया जाना जरूरी है।
इन बिंदुओं पर जांच की जरूरत
0 परमिट और फिटनेस की वैधता
0 ब्रेक, टायर और लाइट की स्थिति
0 अग्निशमन यंत्र की उपलब्धता व वैधता
0 प्राथमिक उपचार पेटी
0 आपातकालीन निकासी व्यवस्था
0 दरवाजे और खिड़कियों की स्थिति
0 निर्धारित क्षमता से अधिक यात्रियों की मौजूदगी
0 लंबी दूरी की बसों में आवश्यक सुरक्षा उपकरण
0 लोकेशन ट्रैकिंग प्रणाली की उपलब्धता
बॉक्स
स्कूल बसों की तर्ज पर बने नियमित जांच व्यवस्था
यात्रियों की संख्या और बसों के लगातार संचालन को देखते हुए परिवहन विभाग द्वारा यात्री बसों की भी समय-समय पर नियमित सुरक्षा जांच किए जाने की जरूरत है। खासकर दूसरे जिलों में पंजीकृत होकर कोरबा से होकर चलने वाली बसों की फिटनेस और सुरक्षा मानकों की जांच भी स्थानीय स्तर पर सुनिश्चित हो, ताकि कागजों में फिट बसें सड़क पर भी सुरक्षित मिलें।
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