कोरबा। जंगलों में इन दिनों महुआ फूलों की मीठी खुशबू बिखरी है और संग्रहण का मौसम पूरे शबाब पर है। सुबह होते ही ग्रामीण क्षेत्र के गांवों से महिलाएं, पुरुष और बच्चे टोकरी लेकर जंगल की ओर निकल पड़ते हैं। पेड़ों से गिरे महुआ फूल बीनना यहां के लोगों के लिए सिर्फ रोजमर्रा का काम नहीं, बल्कि आजीविका का सबसे बड़ा आधार है। महुआ से पारंपरिक पेय, लड्डू और अन्य खाद्य पदार्थ तैयार किए जाते हैं, जिनकी स्थानीय बाजारों में अच्छी मांग रहती है। सूखे महुआ फूलों की बिक्री से ग्रामीणों को अतिरिक्त आय मिलती है। खासकर आदिवासी क्षेत्रों में महुआ सिर्फ वन उपज नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा है और यह समय किसी पर्व से कम नहीं माना जाता। हालांकि इस बार बीच-बीच में हो रही बारिश ने इस सीजन की रफ्तार पर असर डाला है। ग्रामीणों का कहना है कि पहले जहां एक दिन में अच्छी मात्रा में महुआ मिल जाता था, अब मौसम के उतार-चढ़ाव के कारण ज्यादा मेहनत करनी पड़ रही है और गुणवत्ता भी प्रभावित हो रही है।
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