कोरबा। सर्दी-खांसी और बुखार को मामूली बीमारी समझकर घर में ही उपचार कराना एक परिवार को भारी पड़ गया। तीन-चार दिनों से बीमार चल रहे तीन वर्षीय मासूम की हालत लगातार बिगड़ती रही। पेट में सूजन आने के बाद भी परिजन घर पर ही सिकाई और उपचार करते रहे। जब उसकी स्थिति गंभीर हो गई तो उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। मामला हरदीबाजार थाना क्षेत्र के ग्राम रलिया का है।
जानकारी के अनुसार रलिया निवासी सनोज कठौते का तीन वर्षीय पुत्र समर कठौते पिछले तीन-चार दिनों से अस्वस्थ था। उसे सर्दी, खांसी और बुखार की शिकायत थी। परिजनों ने उसे तत्काल अस्पताल ले जाने के बजाय घर पर ही उपचार शुरू कर दिया। इस दौरान उसकी तबीयत में सुधार होने के बजाय हालत बिगड़ती गई।बताया गया कि बीमारी के दौरान मासूम के पेट में लगातार सूजन आने लगी। परिजन पेट की सिकाई करते रहे, लेकिन उसकी स्थिति गंभीर होती चली गई। आखिरकार हालत बिगड़ने पर उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल लाया गया। यहां चिकित्सकों ने उपचार शुरू किया, लेकिन मासूम को बचाया नहीं जा सका। अस्पताल से मिले मेमो के आधार पर पुलिस ने मामले की जानकारी जुटाई। पूछताछ में मासूम के निमोनिया से पीड़ित होने की बात सामने आई। घटना के बाद यह मामला बीमारी के शुरुआती लक्षणों को गंभीरता से लेने और समय पर चिकित्सकीय सलाह लेने की जरूरत को रेखांकित करता है। सर्दी, खांसी और लगातार बुखार के साथ यदि बच्चे की हालत बिगड़ रही हो तो घरेलू उपचार के बजाय तत्काल चिकित्सक से परामर्श लेना जरूरी है।
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