कोरबा। रोजी-रोटी की तलाश में घर से निकलने वाले मजदूरों की जिंदगी सडक़ पर किस तरह जोखिम में डाली जा रही है, इसकी तस्वीर मालवाहक वाहनों में दिखाई दे रही है। सामान ढोने के लिए बनाए गए मेटाडोर और अन्य मालवाहक वाहनों में मजदूरों को बैठाकर परिवहन किया जा रहा है। क्षमता से अधिक लोगों को ठूंसकर चलने वाले इन वाहनों में सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं होते। ऐसे में मामूली हादसा भी कई जिंदगियों पर भारी पड़ सकता है।
मालवाहक वाहन में यात्रियों या मजदूरों को इस तरह ले जाना मोटर वाहन नियमों का उल्लंघन है। इसके बावजूद सडक़ पर ऐसे वाहन आसानी से नजर आ जाते हैं। मजदूर भी आर्थिक मजबूरी के चलते जोखिम भरा सफर करने को विवश हैं। सवाल यह है कि यदि ओवरलोड वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो जाए तो इसकी जिम्मेदारी आखिर किसकी होगी? मालवाहक वाहन में सवारी बैठाना परमिट की शर्तों का उल्लंघन माना जा सकता है। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 192ए के तहत बिना परमिट या परमिट की शर्तों के उल्लंघन पर जुर्माने और कारावास का प्रावधान है। वहीं ओवरलोडिंग और सुरक्षित परिवहन से जुड़े उल्लंघनों पर भी कार्रवाई की जा सकती है। इसके बावजूद नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहन चालकों पर प्रभावी अंकुश नजर नहीं आ रहा। नियमित जांच और कार्रवाई के अभाव में मालवाहक वाहनों में यात्रियों को ढोने का सिलसिला जारी है। मेटाडोर जैसे वाहनों में मजदूरों को खड़े या बेहद सीमित जगह में बैठाकर ले जाया जाता है। इनमें यात्रियों की सुरक्षा के लिए यात्री वाहन जैसी व्यवस्था भी नहीं होती। तेज रफ्तार, अचानक ब्रेक या सडक़ पर मामूली असंतुलन की स्थिति में सवार लोग वाहन से बाहर गिर सकते हैं। ओवरलोड वाहन का संतुलन बिगडऩे पर स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में एक छोटी सी लापरवाही दर्जनों मजदूरों की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है। कम आय वाले मजदूरों के लिए आने-जाने का सस्ता साधन उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में वे मालवाहक वाहनों में सफर करने को मजबूर होते हैं। वाहन संचालक भी उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर एक ही वाहन में क्षमता से कहीं अधिक लोगों को बैठा देते हैं। इससे कमाई बढ़ती है, लेकिन जोखिम पूरी तरह मजदूरों के हिस्से में चला जाता है।
नियमित जांच पर उठ रहे सवाल
सडक़ पर खुलेआम नियमों का उल्लंघन होने के बावजूद ऐसे वाहनों की नियमित जांच और प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से परिवहन विभाग और जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठ रहे हैं। कागजों में मौजूद सख्त प्रावधान तब तक बेअसर हैं, जब तक सडक़ पर नियम तोडऩे वाले वाहनों के खिलाफ लगातार कार्रवाई नहीं होती। मजदूरों की सुरक्षा के लिए मालवाहक वाहनों में सवारी ढोने पर प्रभावी रोक और नियमित जांच जरूरी है, ताकि किसी बड़े हादसे के बाद कार्रवाई की बजाय पहले ही जोखिम को खत्म किया जा सके।
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