कोरबा। जनपद पंचायत कोरबा अंतर्गत ग्राम पंचायत पताढ़ी में अडानी पावर प्लांट से प्रभावित ग्रामीणों और स्थानीय युवाओं के अधिकारों को लेकर उठी आवाज अब विवाद के केंद्र में आ गई है। रोजगार, सीएसआर, बुनियादी सुविधाओं, सड़क, सुरक्षा और एनएच-49 पर अव्यवस्थित पार्किंग जैसे मुद्दों को लेकर ग्रामीणों द्वारा लगातार शिकायतें किए जाने के बीच स्थानीय युवा प्रतिनिधि शुभम अनंत ने युवा कांग्रेस से जुड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि उनके जनहित के मुद्दे उठाने से नाराज होकर करीब 15-20 लोग उनके घर पहुंचे और जबरन घर में घुसकर गाली-गलौज करते हुए परिवार समेत जान से मारने की धमकी दी।
शुभम अनंत की शिकायत के अनुसार, 7 सितंबर की रात करीब 10:30 बजे युवा कांग्रेस कार्यकर्ता एवं जनपद सदस्य अनिल खुंटे, शैलेंद्र कुर्रे, हिटलर खुंटे, सुरेश दिवाकर सहित करीब 15-20 अन्य लोग स्कार्पियो, बोलेरो और थार समेत कई चारपहिया वाहनों में उनके घर पहुंचे। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इन लोगों ने घर में घुसकर अभद्रता की और उन्हें तथा उनके परिवार को गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि धमकी के दौरान उन्हें कथित रूप से यह कहा गया कि जनहित के मुद्दे उठाना बंद करो, हमारी सरकार आएगी तो तुम्हें निपटा देंगे। यदि शिकायत में लगाए गए ये आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो यह महज आपसी विवाद नहीं, बल्कि जनहित की आवाज दबाने और लोकतांत्रिक तरीके से सवाल उठाने वाले व्यक्ति को भयभीत करने का गंभीर मामला माना जाएगा।
रोजगार और मजदूरों के अधिकारों को लेकर ग्रामीणों का मोर्चा
पताढ़ी के ग्रामीणों का कहना है कि अडानी पावर प्लांट के कारण क्षेत्र प्रभावित हुआ है, इसलिए स्थानीय लोगों को रोजगार, विकास कार्यों और सामाजिक दायित्वों का समुचित लाभ मिलना चाहिए। ग्रामीणों ने प्लांट प्रबंधन को ज्ञापन देकर कोयला परिवहन में लगे वाहनों पर तिरपाल बांधने और खोलने के कार्य में कथित ठेकेदारी व्यवस्था समाप्त करने की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि वर्तमान व्यवस्था में श्रमिकों को नियमानुसार पीएफ और ईएसआई जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। साथ ही समय पर मानदेय भुगतान नहीं होने से मजदूर परिवारों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो रहा है। ग्रामीणों ने पूर्व की व्यवस्था बहाल कर स्थानीय युवाओं द्वारा गठित जीएमसी कंस्ट्रक्शन के माध्यम से स्थानीय मजदूरों को रोजगार देने तथा पीएफ-ईएसआई सुनिश्चित करने की मांग की है।
आठ सूत्रीय विकास मांगों को लेकर भी उठी आवाज
ग्राम पंचायत के माध्यम से अडानी फाउंडेशन और प्लांट प्रबंधन के समक्ष ग्रामीणों ने आठ सूत्रीय विकास प्रस्ताव रखा है। इसमें प्रत्येक घर के सामने सोलर लाइट, शुद्ध पेयजल, पक्की सड़क, नाली निर्माण, शासकीय माध्यमिक शाला पताढ़ी को 12वीं तक क्रमोन्नत करने, स्कूल मैदान में खेल उपकरण और युवाओं के लिए ओपन जिम की व्यवस्था जैसी मांगें शामिल हैं।
इसके अलावा एनएच-49 पर यात्री प्रतीक्षालय, अधिग्रहित जमीनों के लिए किसानों को चार गुना मुआवजा, प्रभावित परिवारों को रोजगार तथा पंचायत क्षेत्र की खतरनाक खुली खदानों में ट्यूबवेल और मुरुम-मिट्टी भराव की मांग भी रखी गई है।
एनएच-49 पर 500 से अधिक वाहनों की पार्किंग का आरोप
ग्रामीणों ने जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, आरटीओ और एनएचएआई को दिए शिकायत पत्र में अडानी प्लांट गेट के समीप एनएच-49 पुल के नीचे अव्यवस्थित पार्किंग और अतिक्रमण का मुद्दा भी उठाया है। ग्रामीणों के अनुसार पुल के नीचे 500 से अधिक दोपहिया वाहन बेतरतीब तरीके से खड़े रहते हैं, जिससे भारी कोयला वाहनों की आवाजाही के बीच दुर्घटना की आशंका बनी रहती है।
ग्रामीणों ने अवैध ठेलों-दुकानों के अतिक्रमण को हटाने, नियमित पुलिस गश्त बढ़ाने, आरटीओ जांच कराने और प्लांट सिक्योरिटी की निगरानी में व्यवस्थित पार्किंग जोन बनाने की मांग की है। वाहनों की चोरी की घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने की मांग भी शिकायत में की गई है।
सवाल बड़ा है—क्या जनहित की आवाज उठाना अपराध है?
इस पूरे घटनाक्रम ने क्षेत्र में कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि कोई ग्रामीण या स्थानीय युवा रोजगार, मजदूरों के अधिकार, सड़क, सुरक्षा और विकास जैसे मुद्दों को प्रशासन के सामने रखता है, तो उसका जवाब धमकी से दिया जाना लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक है। वहीं, शिकायत में नामजद लोगों पर लगाए गए आरोपों की सत्यता पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
शुभम अनंत ने उरगा थाना सहित पुलिस अधीक्षक और कलेक्टर को आवेदन देकर अपनी और परिवार की सुरक्षा की मांग की है। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की गुहार लगाई है।
फिलहाल पुलिस शिकायत के आधार पर मामले की जांच कर रही है। पुलिस द्वारा सभी पक्षों के बयान, घटनास्थल से जुड़े साक्ष्य और अन्य तथ्यों की जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता सामने आएगी। आरोप सिद्ध होने पर ही संबंधित व्यक्तियों के विरुद्ध वैधानिक कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट होगी।
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