कोरबा। कोरबा जिले में हाथियों ने जंगलों के पारंपरिक ठिकानों से आगे बढक़र छोटी पहाडिय़ों और सीमा से लगे इलाकों को अपना नया सुरक्षित ठिकाना बनाना शुरू कर दिया है। कुदमुरा का कलमीटिकरा, करतला का लबेद, जटगा का कुटेश्वर नगोई और केंदई की कोरबी पहाड़ी अब हाथियों की लगातार आवाजाही वाले प्रमुख क्षेत्र बन गए हैं। खास बात यह है कि कलमीटिकरा से धरमजयगढ़ की सीमा जुड़ी होने के कारण हाथियों के आने-जाने का यह इलाका एक महत्वपूर्ण प्रवेश मार्ग के रूप में सामने आया है।
वर्तमान में कोरबा वनमंडल के करतला रेंज के लबेद में करीब 15 हाथी मौजूद हैं। वहीं कटघोरा वनमंडल के केंदई और पसान क्षेत्र में करीब 50 हाथियों की मौजूदगी बनी हुई है। इनमें दंतैल हाथियों की गतिविधियां सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण हैं। कोरबी क्षेत्र का दंतैल कई बार जंगल से निकलकर हाईवे तक पहुंच रहा है। पसान रेंज में मरवाही की ओर से पहुंचे हाथी अभी सीमा क्षेत्र में ही घूम रहे हैं। इससे वन विभाग के सामने हाथियों की निगरानी के साथ-साथ उनके लगातार बदलते रास्तों पर नजर रखने की चुनौती बढ़ गई है। एक क्षेत्र में हाथियों को नियंत्रित करने के बाद दूसरे इलाके से उनका प्रवेश होने की स्थिति बन रही है। धरमजयगढ़ से आया दंतैल कुदमुरा रेंज के कलमीटिकरा तक पहुंच चुका है। कलमीटिकरा के आगे धरमजयगढ़ की सीमा होने से यह क्षेत्र हाथियों की आवाजाही का महत्वपूर्ण मार्ग बनता जा रहा है। बरपाली में पहुंचते ही दंतैल ने किसान की धान की फसल को भी नुकसान पहुंचाया।
दिन में भी खेतों में पहुंच रहे झुंड
धान की फसल लगने के बाद हाथियों के झुंड जंगल से निकलकर खेतों का रुख कर रहे हैं। अब कई इलाकों में दिन के समय भी हाथियों की मौजूदगी देखी जा रही है। पिछले 15 दिनों में करीब 200 किसानों की फसल प्रभावित हुई है। फसल बचाने की कोशिश में ग्रामीण खुद हाथियों को भगाने के लिए खेतों में पहुंच रहे हैं, जिससे कई बार हाथियों के आक्रामक होने का खतरा बढ़ जाता है।हाथियों की आवाजाही को देखते हुए निगरानी बढ़ाई गई है। वन अमला लगातार हाथियों के मूवमेंट पर नजर रख रहा है और ग्रामीणों को सतर्क किया जा रहा है।
पहाड़ी क्षेत्र क्यों बन रहे पसंदीदा ठिकाने
वन क्षेत्रों में हाथियों ने छोटी पहाडिय़ों को अपेक्षाकृत सुरक्षित ठिकाने के रूप में चुन लिया है। लबेद, कुटेश्वर नगोई और कोरबी पहाड़ी जैसे इलाकों में झुंड लंबे समय तक रुक रहे हैं। इन स्थानों से हाथियों को आसपास के जंगल और खेती वाले क्षेत्रों में जाने के लिए कई रास्ते भी मिल जाते हैं। यही वजह है कि इन क्षेत्रों में हाथियों की मौजूदगी बार-बार सामने आ रही है।
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