कोरबा। कोरबा के वनांचल में मानव-हाथी संघर्ष का असर अब सड़क से लेकर खेतों तक नजर आने लगा है। केंदई रेंज का लोनर हाथी गुरुवार शाम एक बार फिर नेशनल हाईवे पर पहुंच गया, जबकि एतमानगर रेंज के बंजारी सर्किल में सक्रिय 18 हाथियों के दल ने रातभर खेतों में विचरण कर धान की फसल को नुकसान पहुंचाया। एक ही समय में हाथियों की मौजूदगी ने ग्रामीणों के साथ हाईवे से गुजरने वाले राहगीरों की भी चिंता बढ़ा दी।
केंदई रेंज में लंबे समय से विचरण कर रहा लोनर हाथी शाम को कापानवापारा के पास कटघोरा-अंबिकापुर नेशनल हाईवे क्रमांक-130 पर पहुंच गया। हाथी को सड़क पर देखकर वाहन चालकों में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम हाथी मित्र दल के सदस्यों के साथ मौके पर पहुंची। एहतियात के तौर पर दोनों ओर वाहनों को रोक दिया गया। वन विभाग की टीम ने वाहन का सायरन बजाकर हाथी को सड़क से हटाने का प्रयास किया, लेकिन वह काफी देर तक हाईवे पर ही विचरण करता रहा। इससे दोनों ओर वाहनों की कतार लग गई। काफी मशक्कत के बाद हाथी जंगल की ओर चला गया, तब जाकर यातायात बहाल हो सका। क्षेत्रवासियों के अनुसार यह लोनर हाथी लगातार आबादी और सड़क के आसपास पहुंच रहा है, जिससे हाईवे पर दुर्घटना और जनहानि का खतरा बना हुआ है। उधर एतमानगर रेंज के बंजारी सर्किल में सक्रिय 18 हाथियों के दल ने भी ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी। बताया गया कि हाथियों का दल बंजारी से मड़ई क्षेत्र पहुंचा और खेतों में लगी फसल को नुकसान पहुंचाने के बाद वापस बंजारी होते हुए केंदई रेंज के परला पहुंच गया। यहां भी हाथियों ने खेतों में घुसकर बड़ी मात्रा में धान की फसल रौंद दी।
फसल को नुकसान पहुंचाने के बाद दल सुबह होने से पहले मड़ई क्षेत्र के जंगल में लौट गया। लगातार बदलते ठिकानों के कारण वन विभाग की निगरानी और ग्रामीणों की सतर्कता दोनों बढ़ गई हैं। एक तरफ लोनर के हाईवे पर पहुंचने से यातायात सुरक्षा चुनौती बनी हुई है, तो दूसरी ओर हाथियों के दल से किसानों की खड़ी फसल को नुकसान पहुंच रहा है।
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