कोरबा। कटघोरा स्थित अटल परिसर में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी का ब्रांज मेटल के बजाय सीमेंट की प्रतिमा स्थापित करने के आरोप लगा है। इसके साथ ही सियासत गरमा गई है। जहां कांग्रेस के वरिष्ठ नेता सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया दे रहे हैं, वहीं संगठन के स्थानीय पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं ने भी मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेसियों ने प्रतिमा के सामने धरना प्रदर्शन करते हुए निष्पक्ष जांच व दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। इससे पहले भाजपा जिलाध्यक्ष गोपाल मोदी जांच व कार्रवाई की मांग को लेकर कलेक्टर को पत्र भी लिख चुके हैं। राज्य शासन द्वारा सभी नगर निगम, नगर पालिका परिषद व नगर पंचायत में अटल परिसर निर्माण व पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी की प्रतिमा स्थापित करने की योजना तैयार की थी। इस योजना के तहत नगर पालिका परिषद कटघोरा में भी अटल परिसर निर्माण का ठेका मनोज अग्रवाल नामक ठेकेदार को दिया गया था। ठेकेदार ने निर्माण की जिम्मेदारी पेटी ठेकेदार को सौंप दिया। पेटी ठेकेदार ने अटल परिसर निर्माण के बाद पूर्व प्रधानमंत्री की प्रतिमा तो स्थापित की, लेकिन बारिश ने गड़बड़झाले की पोल खोल दी। आरोप है कि ब्रांज मेटल के बजाय सीमेंट की प्रतिमा स्थापित की गई है। इस प्रतिमा को ब्रांज पेंट से ढंकने का प्रयास किया गया था, जो बारिश के साथ ही उखडने लगा है। यह आरोप लगने के बाद सियासत गरमा गई है। प्रदेश के वरिष्ठ कांग्रेस नेता भाजपा पर हमलावर हो गए हैं। उनके द्वारा सोशल मीडिया के माध्यम से प्रतिक्रिया देते हुए जांच व कार्रवाई की मांग तेज कर दी गई है। इधर शुक्रवार को युवा कांग्रेस ग्रामीण के जिलाध्यक्ष विकास सिंह की अगुवाई में पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं ने अटल परिसर स्थित प्रतिमा के सामने धरना प्रदर्शन कर विरोध जताया। जिलाध्यक्ष श्री सिंह ने कहा कि अटल बिहारी बाजपेयी जैसे विभूति की प्रतिमा के निर्माण में भारी अनियमितता बरती गई है। जिस प्रतिमा को ब्रांज मेटल का बताया गया, वह सीमेंट से निर्मित होने की बातें सामने आई है। यह न सिर्फ भारी आर्थिक अनियमितता के दायरे में आता है, बल्कि भारतरत्न अटल बिहारी बाजपेयी के सम्मान के साथ भी खिलवाड़ है। उन्होंने नगर पालिका के सीएमओ को हटाने की मांग की है। इसके साथ ही मामले की जांच कर ठेकेदार और भाजयुमो मंडल अध्यक्ष पर कार्रवाई की मांग की है। युवा कांग्रेस के पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं द्वारा धरना प्रदर्शन किए जाने की खबर मिलते ही पुलिस व प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची। अफसरों ने धरना प्रदर्शन कर रहे कांग्रेसियों को समझाईश देते हुए आंदोलन समाप्त कराने का प्रयास किया, लेकिन कांग्रेसी अपनी मांग पर अड़े रहे। उनका आंदोलन जारी रहा। इस पूरे मामले को कांग्रेस भ्रष्टाचार का बड़ा मामला बता रही है।
उप अभियंता निलंबित
नगरीय प्रशासन व विकास विभाग ने कांस्य प्रतिमा के मानकों के अनुरूप नहीं होने पर उप अभियंता चन्द्र प्रकाश जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। नगरीय प्रशासन विभाग ने संचालनालय से उनके निलंबन का आदेश जारी किया है। स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमा से संबंधित शिकायतों पर नगरीय प्रशासन व विकास विभाग के बिलासपुर क्षेत्रीय कार्यालय के संयुक्त संचालक द्वारा प्रस्तुत जाँच प्रतिवेदन के आधार पर निलंबन की यह कार्रवाई की गई है। जांच प्रतिवेदन में प्रतिमा निर्माण कार्य प्राक्कलन के प्रावधानों के विपरीत होना, विभिन्न भागों से परत उखड़ने, सतत् क्षतिग्रस्त होने तथा कांस्य प्रतिमा मानकों के अनुरूप नहीं होने के कारण निर्माण प्रक्रिया में पदस्थापना के दौरान की गई अनियमितता में उप अभियंता उत्तरदायी पाए गए हैं। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय संयुक्त संचालक क्षेत्रीय कार्यालय नगरीय प्रशासन व विकास दुर्ग नियत किया गया है।
क्या छोटे कर्मचारी को बनाया गया बलि का बकरा?
प्रतिमा निर्माण में सामने आई गंभीर अनियमितताओं पर राज्य शासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उप अभियंता चंद्र प्रकाश जायसवाल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। हालांकि इस कार्रवाई के बाद पूरे कटघोरा में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या पूरे मामले का ठीकरा सिर्फ एक उप अभियंता के सिर फोड़कर असली जिम्मेदारों को बचाया जा रहा है? शासन की कार्रवाई के बाद क्षेत्र में चर्चा है कि आखिर नगर पालिका के तत्कालीन जिम्मेदार अधिकारी, गुणवत्ता परीक्षण करने वाले, निर्माण एजेंसी और ठेकेदारों पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई? प्रतिमा निर्माण कराने वाले मूल ठेकेदार और पेटी ठेकेदार पर भी अब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि भाजपा संगठन की ओर से भी इस मामले में अब तक कोई स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई है। हालांकि शासन ने पहली कार्रवाई कर दी है, लेकिन अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या जांच आगे बढ़ेगी और प्रतिमा निर्माण से जुड़े अन्य जिम्मेदार अधिकारियों, निर्माण एजेंसी तथा ठेकेदारों पर भी कार्रवाई होगी, या फिर पूरा मामला केवल एक कर्मचारी के निलंबन तक ही सीमित रह जाएगा।
उप अभियंता का आरोपों से इनकार
निलंबित उप अभियंता चंद्र प्रकाश जायसवाल ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि प्रतिमा का निर्माण मनोज कुमार अग्रवाल द्वारा कराया जा रहा था। निर्माणकर्ता ने गुणवत्ता परीक्षण की रिपोर्ट प्रस्तुत की थी। निर्माण के दौरान स्वयं नगर पालिका के अधिकारियों एवं तत्कालीन सीएमओ द्वारा भी मौके का निरीक्षण किया गया था। जायसवाल का कहना है कि उन्होंने प्रतिमा के बाहरी स्वरूप के आधार पर देयक तैयार किया था, प्रतिमा को तोड़कर उसकी आंतरिक गुणवत्ता जांचना उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं था। उनका दावा है कि इस पूरे मामले में उनकी कोई व्यक्तिगत लापरवाही नहीं है।
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