कोरबा। 2 हजार से अधिक के व्यापारी यूपीआई लेन-देन पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) को लेकर व्यापारिक संगठनों का विरोध शुरू हो गया है। जिला चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर नई शुल्क व्यवस्था को वापस लेने और यूपीआई लेन-देन पर एमडीआर शून्य रखने की मांग की।
चैंबर ने कहा कि यूपीआई ने देश में डिजिटल भुगतान व्यवस्था को आसान और व्यापक बनाया है। छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े व्यापारिक प्रतिष्ठानों तक ने त्वरित और सुरक्षित भुगतान के लिए इसे अपनाया है। ऐसे में 2 हजार से अधिक के व्यापारी लेन-देन पर एमडीआर लागू होने से व्यापारियों की लेन-देन लागत बढ़ेगी। चैंबर अध्यक्ष योगेश जैन ने कहा कि यूपीआई की सरल, त्वरित और सुरक्षित व्यवस्था से व्यापारियों और ग्राहकों दोनों को सुविधा मिली है। नई शुल्क व्यवस्था से व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ेगा। उन्होंने डिजिटल भुगतान व्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए एमडीआर को शून्य रखने की मांग की। महामंत्री नरेंद्र अग्रवाल ने कहा कि छोटे और मध्यम व्यापारियों के लिए प्रत्येक लेन-देन पर अतिरिक्त शुल्क चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यूपीआई को अधिक प्रभावी और व्यापारियों के लिए सुविधाजनक बनाए रखने के लिए मौजूदा शून्य एमडीआर व्यवस्था जारी रहनी चाहिए।
15 अक्टूबर से लागू होनी है नई व्यवस्था
नई व्यवस्था के तहत 2 हजार से अधिक के निर्दिष्ट पर्सन-टू-मर्चेंट यूपीआई लेन-देन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लागू होगा। हालांकि 2 हजार तक के व्यापारी भुगतान और निर्धारित श्रेणी के छोटे व्यापारियों के लेन-देन शून्य एमडीआर के दायरे में रहेंगे। केंद्र के अनुसार एमडीआर ग्राहक से नहीं लिया जाएगा।
![]()
































