कोरबा। एसईसीएल कुसमुंडा खदान में रोजगार के मुद्दे को लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और भूविस्थापित-प्रभावितों ने प्रबंधन पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। ठेका कंपनियों में बाहरी कामगारों की भर्ती और स्थानीय लोगों को रोजगार में प्राथमिकता नहीं मिलने का आरोप लगाते हुए विश्व हिंदू परिषद के जिलाध्यक्ष एवं पूर्व पार्षद अमरजीत सिंह के नेतृत्व में जनप्रतिनिधियों और प्रभावितों का प्रतिनिधिमंडल कुसमुंडा जीएम कार्यालय पहुंचा। यहां जीएम सचिन तानाजी पाटिल के साथ बैठक कर रोजगार से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की गई।
बैठक में गोदावरी कंपनी का काम खत्म होने के बाद करीब 250 कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा होने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि प्रबंधन की ओर से इन कर्मचारियों को नई ठेका कंपनी में रोजगार देने की बात कही गई थी, लेकिन अब तक इस दिशा में ठोस पहल नहीं हुई है। इनमें से कई कर्मचारियों को केएनआर कंपनी में रोजगार दिए जाने की बात कही गई थी। प्रतिनिधिमंडल ने कुसमुंडा खदान की केएनआर, नीलकंठ सहित अन्य ठेका कंपनियों में भूविस्थापितों और प्रभावित परिवारों को प्राथमिकता के आधार पर रोजगार देने की मांग रखी। जिला पंचायत सदस्य विनोद यादव ने ठेका कंपनियों में बाहरी भर्ती का विरोध करते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के लिए निर्धारित 70:30 के अनुपात का पालन होना चाहिए। उनके अनुसार 70 प्रतिशत रोजगार क्षेत्र के भूविस्थापितों और प्रभावितों को तथा 30 प्रतिशत कामगार कंपनी अपनी आवश्यकता के अनुसार रख सकती है। विनोद यादव ने आरोप लगाया कि ठेका कंपनियों द्वारा इस अनुपात का पालन नहीं किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि विभिन्न कंपनियों में भर्ती और कार्यरत कर्मचारियों की पूरी जानकारी जुटाई जाएगी। यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो ठेका कंपनियों की मनमानी के खिलाफ आने वाले समय में बड़ा आंदोलन किया जाएगा। इस अवसर पर विहिप जिलाध्यक्ष अमरजीत सिंह, जिला पंचायत सदस्य विनोद यादव, कटघोरा विधायक प्रतिनिधि संतोष राठौर, नगर निगम पार्षद प्रेम साहू, पालिका पार्षद तेज प्रताप सिंह, पवन गुप्ता, मयंक पांडेय सहित बड़ी संख्या में भूविस्थापित एवं प्रभावित उपस्थित रहे।
15 अक्टूबर तक का समय, फिर बनेगी आंदोलन की रणनीति
बैठक के दौरान कुसमुंडा जीएम ने समस्याओं के निराकरण के लिए 15 अक्टूबर तक का समय मांगा। प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि तय समय में रोजगार से जुड़े मामलों में ठोस पहल नहीं हुई तो आगे आंदोलन की रणनीति तय की जाएगी। इससे कुसमुंडा खदान क्षेत्र में स्थानीय रोजगार का मुद्दा एक बार फिर जोर पकड़ने के संकेत हैं।
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