कोरबा। गंभीर मरीजों को सुरक्षित और समय पर दूसरे अस्पताल पहुंचाने के लिए इस्तेमाल होने वाली एनसीएच अस्पताल गेवरा की एंबुलेंस की लगातार दुर्घटनाओं ने पूरी रेफरल व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 15 सितंबर को गेवरा से बिलासपुर जा रही एंबुलेंस डूमरकछार-पाली के पास आगे चल रहे ट्रेलर से जा भिड़ी। हादसे में एंबुलेंस में सवार दोनों रेफर मरीज और उनके अटेंडर घायल हो गए। उन्हें दूसरी एंबुलेंस से बिलासपुर भेजना पड़ा। बताया जा रहा है कि पिछले तीन महीने में एनसीएच अस्पताल की एंबुलेंस से जुड़ी यह चौथी दुर्घटना है।
जानकारी के अनुसार एनसीएच अस्पताल गेवरा से त्रिपुरा राइफल्स के आरक्षक सूबे राम और दीपका कॉलोनी निवासी एसईसीएल कर्मचारी दयाराम को श्रीराम केयर अस्पताल बिलासपुर रेफर किया गया था। रेफरल की प्रक्रिया पूरी होने के बाद मरीजों को एंबुलेंस से बिलासपुर भेजने की तैयारी थी। जानकारी के अनुसार सेकंड शिफ्ट में ड्यूटी पर मौजूद चालक रंजीत के शराब के नशे में होने की बात सामने आई। इसके बाद दूसरे चालक अमित को एंबुलेंस लेकर मरीजों को बिलासपुर ले जाने के लिए कहा गया। रंजीत भी एंबुलेंस में चालक के बगल में बैठ गया। डूमरकछार-पाली के पास एंबुलेंस अनियंत्रित होकर आगे चल रहे ट्रेलर से टकरा गई।
बार-बार हादसे, ठेका व्यवस्था पर भी उठे सवाल
लगातार हो रही दुर्घटनाओं ने मरीजों और उनके परिजनों की चिंता बढ़ा दी है। सवाल यह है कि गंभीर मरीजों को रेफर करने के लिए इस्तेमाल होने वाली एंबुलेंस के संचालन, चालक की फिटनेस और ड्यूटी से पहले उसकी स्थिति की निगरानी के लिए क्या व्यवस्था है? यदि चालक की हालत को लेकर पहले ही आपत्ति सामने आ गई थी तो उसे एंबुलेंस में बैठने की अनुमति क्यों दी गई? तीन महीने में चौथी दुर्घटना की जानकारी सामने आने के बाद एंबुलेंस संचालन की ठेका व्यवस्था, चालकों की जांच और वाहनों के संचालन की निगरानी पर भी सवाल उठने लगे हैं। मरीजों की जान से जुड़ी इस व्यवस्था में बार-बार दुर्घटनाओं के बावजूद सुधार के लिए क्या कदम उठाए गए, यह भी जांच का विषय है।
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