कोरबा। जिले के दादरखुर्द गांव में आयोजित होने वाली भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी की ऐतिहासिक रथयात्रा इस वर्ष अपने 126वें वर्ष में प्रवेश कर रही है। पिछले 125 वर्षों से लगातार चली आ रही यह धार्मिक परंपरा आज भी पूरे क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और सामाजिक एकता का प्रतीक बनी हुई है। इस बार 16 जुलाई गुरुवार को भगवान श्री जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा की भव्य रथयात्रा पूरे धार्मिक उल्लास और वैदिक विधि-विधान के साथ निकाली जाएगी। दादरखुर्द स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में हर वर्ष की तरह इस बार भी हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में विशाल आयोजन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। गांव के युवा, बुजुर्ग और महिलाएं आयोजन को सफल बनाने में जुटे हुए हैं। आसपास के गांवों के साथ-साथ कोरबा शहर व अन्य क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है। आयोजन समिति के अनुसार रथ यात्रा के दिन सुबह 8 बजे से भजन-कीर्तन का शुभारंभ होगा। इसके बाद दोपहर 1 बजे से महाभंडारे का आयोजन किया जाएगा, जिसमें हजारों श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करेंगे। शाम 4 बजे भगवान जगन्नाथ, बलभद्र व माता सुभद्रा की भव्य रथयात्रा मंदिर परिसर से प्रारंभ होकर पारंपरिक मार्गों से निकलेगी। श्रद्धालु रस्सी खींचकर भगवान के रथ को आगे बढ़ाने का सौभाग्य प्राप्त करेंगे। पूरे मार्ग में जय जगन्नाथ के जयघोष, भजन-कीर्तन और श्रद्धालुओं की अपार आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिलेगा। दादरखुर्द की रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि 126 वर्षों से चली आ रही सांस्कृतिक विरासत है, जिसने पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों को एक सूत्र में बांधकर रखा है। रथयात्रा के दौरान सुरक्षा, पेयजल, साफ-सफाई, यातायात व्यवस्था व श्रद्धालुओं की सुविधाओं के लिए विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं। आयोजन समिति ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे इस ऐतिहासिक व पावन अवसर पर परिवार सहित पहुंचकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करें तथा इस गौरवशाली परंपरा के साक्षी बनें। गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि इस रथयात्रा की शुरूआत लगभग सवा सदी पहले हुई थी और तब से बिना किसी व्यवधान के इसका आयोजन होता आ रहा है। बदलते समय के साथ आयोजन का स्वरूप भले ही भव्य हुआ हो, लेकिन इसकी मूल परंपरा और धार्मिक मर्यादा आज भी अक्षुण्ण बनी हुई है।
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