कोरबा। मेडिकल कॉलेज अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों के इलाज का तरीका सर्पदंश पीड़ित की जान सांसत में डाल रहा है। ऐसी ही घटना अस्पताल में लगातार सामने आ रही है। एक बार फिर इलाज के हुई लेट लतीफी के कारण युवक की मौत हो गई है। सर्पदंश से मौत की यह सप्ताह भर के भीतर तीसरी घटना है। करतला थानांतर्गत ग्राम बताती में सौरव समुंदर नामक व्यवसायी द्वारा गैस फैक्ट्री का निर्माण कराया जा रहा है, जहां ग्राम हाटी, थाना छाल जिला रायगढ़ निवासी गुलाब सोनी चौकीदारी का काम करता है। उसके साथ ही फैक्ट्री में इकलौता पुत्र भोला सोनी 22 वर्ष व बहू भुनेश्वरी भी रहते थे। प्रतिदिन की तरह शुक्रवार की रात करीब 8.30 बजे भोला और उसकी पत्नी ने परिवार के साथ बैठकर भोजन किया, इसके बाद दोनों समीप ही स्थित हाथी रेस्क्यू सेंटर के प्रथम तल में सोने चले गए। भोला रात लगभग 9 बजे पानी लेने के लिए सीढ़ी से नीचे उतर रहा था। इसी दौरान जमीन पर रेंग रहे करैत प्रजाति के सर्प ने भोला को डस लिया। इस बात का अहसास भोला को थोड़ी देर बाद हुआ। उसने सीढ़ी के समीप जाकर देखा तो सांप बैठा मिला। उसने घटना की जानकारी परिजनों को दी। परिजनो ने भोला तो तत्काल इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाने का निर्णय लिया। वे बाइक से करीब 25 किलोमीटर का सफर कर भोला के साथ अस्पताल पहुंचे, जहां करीब 18 घंटे तक चले इलाज के बाद भोला की मौत हो गई। उसकी मौत को लेकर परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों की मानें तो वे भोला को समय पर अस्पताल लेकर पहुंच गए थे। इस दौरान ड्यूटी मौजूद डॉक्टर ने उसे बैठने के लिए कह दिया। उसे करीब आधे घंटे तक टेबल में बिठा कर रखा गया। बार बार इलाज के लिए कहे जाने पर सांप की तस्वीर मांगी गई। उन्होंने सांप की तस्वीर भी दिखाया, बावजूद इसके डॉक्टर सहित अन्य स्टाफ अपने काम में मशगुल रहे। वे लगातार उसने उपचार के लिए गुहार लगाते रहे, लेकिन किसी ने नही सुनी। जब आधे घंटे बाद भोला को उल्टी होने लगी, उसके मुंह से झाग निकलने लगा, तब कहीं जाकर इलाज शुरू किया गया। परिजनों का कहना है कि यदि समय पर उपचार मिल जाता तो घर के इकलौते चिराग को बुझने से बचाया जा सकता था। खास तो यह है कि सप्ताह भर के भीतर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में सर्पदंश से मौत की यह तीसरी घटना है। इससे पहले भी सांप की तस्वीर मंगाने के फेर में गायत्री नगर मुडापार निवासी एक वृद्धा की जान गई थी। इसकी प्रमुख वजह मेडिकल कॉलेज अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों पर निर्भरता को माना जा रहा है। खासकर रात्रि के समय इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीज और उनके परिजनों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। कई बार वाद विवाद की स्थिति भी निर्मित होती है। मामला उच्च अधिकारियों के संज्ञान में आने के बाद मरीज का इलाज शुरू हो पाता है। बहरहाल अस्पताल पुलिस ने मेमों के आधार पर सर्पदंश से मृत युवक के शव को वैधानिक कार्रवाई उपरांत परिजनों के सुपुर्द कर दिया है।
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12 जून को हुआ था विवाह
घटना में दुखद पहलू तो यह है नवविवाहिता के हाथ की मेंहदी छूटती, इससे पहले मांग उजड़ गई। दरअसल गुलाब के चार संतान थे। जिनमें मृतक इकलौता पुत्र था। उसका विवाह बीते माह यानि 12 जून को गांव में ही रहने वाली युवती से हुई थी। परिजन नई नवेली बहू के पांव भारी होने से बेहद खुश थे, लेकिन उनकी खुशी पर नजर लग गई। इकलौते बेटे को खोने से परिवार पर दुखों का पहाड़ गिर गया है।
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