कोरबा। मेडिकल कॉलेज अस्पताल से सांस लेने में तकलीफ होने पर नवजात शिशु को हायर सेंटर रेफर कर दिया गया। उसे लेकर संजीवनी कर्मी बिलासपुर के लिए रवाना तो हुए, लेकिन झमाझम बारिश के कारण सड़क पर पानी के उफान को पार करना चुनौती से कम नहीं था। इस चुनौती को कर्मचारियों ने सूझबूझ से पार करते हुए न सिर्फ मासूम को अस्पताल पहुंचाया, बल्कि रास्ते भर प्राथमिक उपचार करते हुए उसकी जान भी बचा ली। बताया जा रहा है कि रामपुर क्षेत्र में रमजान खान निवास करते हैं। उन्होंने अपनी पत्नी को प्रसव के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दाखिल कराया था। जहां डॉक्टरों की देखरेख में प्रसव कराया गया। प्रसव के कुछ ही समय बाद नवजात की तबियत बिगड़ गई। डॉक्टरों की देखरेख में सात दिनों तक उपचार चलता रहा, बावजूद इसे सेहत में सुधार नहीं हुई। नवजात को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। वह कुछ अन्य बीमारियों की चपेट में आ चुका था। उसे हायर सेंटर भेजना अनिवार्य था। लिहाजा डाक्टरों ने नवजात को बिलासपुर सिम्स रेफर कर दिया। परिजनों ने नवजात को सिम्स ले जाने 108 संजीवनी एक्सप्रेस के कंट्रोल रूम से संपर्क किया। कंट्रोल रूम से इवेंट मिलते ही ईएमई नवीन कुमार ने ड्यूटी पर तैनात ईएमटी किरण चौहान को पायलट संजय यादव के साथ नवजात को लेकर बिलासपुर रवाना होने निर्देश जारी कर दिया। संजीवनी कर्मी नवजात को लेकर बिलासपुर के लिए रवाना हुए। इस दौरान रास्ते भर नवजात को ऑबजर्व किया जा रहा था। टीम के सामने उस समय चुनौती खड़ी हो गई, जब बिलासपुर की सरहद पर पहुंचते ही भारी बारिश के कारण पुल-पुलिया सहित सड़कों पर उफान होने की जानकारी मिली। किसी तरह पायलट व ईएमटी ने हिम्मत जुटाया। उन्होंने मासूम को किसी भी सूरत में समय पर अस्पताल पहुंचाने की ठान ली। आखिरकार वे सड़क और पुल-पुलियों को सुरक्षित तरीके से पार करते हुए सिम्स तक पहुंच गए। उन्होंने मासूम को अस्पताल में ईलाज के लिए दाखिल कराया, तब कहीं जाकर राहत की सांस ली। यदि संजीवनी कर्मी थोड़ी सी चूक करते तो बड़ी अनहोनी हो सकती थी।
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