कोरबा। जिले में विशेष पिछड़ी जनजाति (पीवीटीजी) बिरहोर परिवारों की पारंपरिक कला को आजीविका का बेहतर साधन बनाने की पहल की जा रही है। कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशन व जिला पंचायत सीईओ प्रतीक जैन के मार्गदर्शन में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के तहत पोड़ी उपरोड़ा विकासखंड के ग्राम कोनकोना के आश्रित ग्राम समेलीभाटा में बिरहोर परिवारों को बांस शिल्प का कौशल उन्नयन प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी) कोरबा के माध्यम से आयोजित प्रशिक्षण 10 से 19 सितंबर तक चलेगा। बिरहोर परिवार पारंपरिक रूप से बांस से टोकनी, सूपा, झापी सहित विभिन्न उपयोगी वस्तुएं बनाकर स्थानीय बाजारों में बेचते हैं। प्रशिक्षण के माध्यम से अब उन्हें पारंपरिक उत्पादों के साथ गुलदस्ते, सीनरी, झालर सहित आधुनिक एवं आकर्षक सजावटी वस्तुएं तैयार करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।इस पहल का उद्देश्य कारीगरों के कौशल में निखार लाने के साथ उत्पादों की गुणवत्ता, विविधता और बाजार उपयोगिता बढ़ाना है। प्रशिक्षण के बाद बिहान के माध्यम से तैयार उत्पादों के लिए बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी कार्य किया जाएगा। इससे बिरहोर परिवारों को अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलने और पारंपरिक हुनर को स्थायी आय के माध्यम में बदलने के अवसर मिलेंगे।
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