कोरबा। मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इंसानियत को शर्मसार करने वाली घटना सामने आई है। सुदूर वनांचल ग्राम में रहकर रोजी मजदूरी करने वाले अधेड़ को तबीयत बिगड़ने पर पड़ोसी ने उपचार के लिए दाखिल कराया। उसने घर रवाना होने से पहले पीड़ित की जेब में जरूरी दस्तावेज के अलावा 45 सौ रूपए रख दिए, ताकि वक्त पर काम आए। पीड़ित की मौत के बाद दस्तावेज तो मिले, लेकिन नगदी गायब मिला। हालांकि मामले की शिकायत परिजनों ने नही की है। लेमरू थानांतर्गत डोकरमना में रहने वाला ललकू राम अगरिया रोजी मजदूरी का काम करता था। मंगलवार को अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। उसे इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां से मरीज को मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया गया। उसे पड़ोसी ने संजीवनी एक्सप्रेस के माध्यम से मेडिकल कॉलेज अस्पताल दाखिल कराया। चूंकि पड़ोसी भी बिना घर में बताए अस्पताल आ गया था। उसे घर जाना जरूरी था। लिहाजा उसने सूझबूझ से काम लिया। उसने मरीज के शर्ट की जेब में आधार कार्ड के अलावा आयुष्मान कार्ड और 45 सौ रूपए नगदी को रख दिया, ताकि जरूरत पड़ने पर काम आ सके। उसके घर रवाना होने के कुछ घंटे बाद मरीज की मौत हो गई। उसके शव को लावारिस मानते हुए मर्च्युरी शिफ्ट कर दिया गया। अस्पताल के कर्मचारियों ने मेमों के साथ आधार कार्ड व आयुष्मान कार्ड भी पुलिस के सुपुर्द किए। जिसकी मदद से पुलिस मृतक की पहचान कार्रवाई में जुटी हुई थी। इस बीच पड़ोसी ने ललकू की तबीयत खराब होने की जानकारी उसके परिजनों को दे दी थी। वे बुधवार की सुबह गृहग्राम पंपापुर सरगुजा से मेडिकल कॉलेज अस्पताल पहुंचे। पुलिस की पूछताछ में मृतक के बड़े भाई पटवारी राम अगरिया ने बताया कि छोटा भाई ललकू दो बच्चों को गृहग्राम में छोड़ लंबे समय से लेमरू क्षेत्र में रहकर रोजी मजदूरी कर रहा था। वह सड़क हादसे में घायल हुआ था,इसके बाद से तबीयत अक्सर खराब रहता था। उसे तबीयत बिगड़ने पर ही पड़ोसी ने अस्पताल दाखिल कराया था। मामले में उस वक्त नया मोड़ आया, जब परिजनों के अलावा पड़ोसी ने भी घर रवान होने से पहले जेब में नगदी रकम रखे जाने की पुष्टि की। परिजनों ने नगदी गायब होने की बात को अनुचित ठहराया। उन्होंने किसी तरह की शिकायत तो नही की है, लेकिन अस्पताल में भर्ती मरीज की जेब से नगदी गायब होने की घटना चर्चा का विषय बन चुका है। बहरहाल पुलिस ने मृतक के शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। इस पूरे मामले में पुलिस की मानवीय चेहरा भी सामने आया है। पहले तो अस्पताल पुलिस ने कर्मचारियों द्वारा सौंपे गए आयुष्मान व आधार कार्ड की मदद से मृतक की पहचान कार्रवाई शुरू की। पुलिस ने परिजनों के पहुंचने पर घटना की जानकारी ली। पहले तो मामले को संदिग्ध माना जा रहा था, लेकिन परिजनों के साथ साथ अस्पताल से भी मरीज की मौत बीमारी से होने की पुष्टि हुई। मेमों निरस्त होने पर पुलिस ने वाहन की व्यवस्था कर शव को परिजनों के साथ गृहग्राम के लिए रवाना किया।
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