कोरबा। बारिश के शुरू होते ही रेंगती मौत का खतरा बढ़ गया है। लोग आए दिन सर्पदंश का शिकार हो रहे हैं। इसके साथ ही सरकारी अस्पतालों में व्यवस्था की पोल भी खुलने लगी है। वृद्धा को करैत प्रजाति के सर्प ने डस लिया। उसे इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल दाखिल कराया गया। डॉक्टर उपचार करने के बजाय सांप की तस्वीर मांगते रहे, जबकि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर ही नदारद मिले। अस्पताल में समय पर उपचार नही मिलने से वृद्धा व बालिका की जान चली गई। मामले में पुलिस ने वैधानिक कार्रवाई की है। पहली घटना मानिकपुर पुलिस चौकी अंतर्गत गायत्री नगर मुड़ापार की है। यहां अंजनी बाई 55 वर्ष परिवार सहित निवास करती थी। वह प्रतिदिन की तरह सोमवार की रात भोजन उपरांत अपने कमरे में सोने चली गई। उसे रात करीब 1 बजे बाएं हाथ की उंगली में कुछ काटने का अहसास हुआ, जिसकी जानकारी वृद्धा ने परिजनों को दी। परिजनों ने बिस्तर में देखा तो करैत प्रजाति का सांप बैठा मिला। जिसकी जानकारी परिजनों ने नोवा नेचर के सदस्य जितेेंद्र सारथी को दी। उन्होंने मौके पर पहुंचकर बेड से घोड़ा करैत नामक सांप को रेस्क्यू किया। इस बीच परिजन वृद्धा को मेडिकल कॉलेज अस्पताल दाखिल करा चुके थे,जहां वृद्धा की मौत हो गई। बताया जा रहा है कि परिजनों ने समय रहते वृद्धा को अस्पताल दाखिल कराया था, लेकिन डॉक्टर सांप की तस्वीर मांग रहे थे। वे सांप को देखे बिना उपचार के लिए तैयार नही थे। यदि समय पर इलाज मिल जाता तो वृद्धा की जान बच सकती थी। इसी तरह दूसरी घटना कटघोरा थाना क्षेत्र के नानबांका की है। यहां श्रवण कुमार नेटी निवास करता है। वह निजी एजेंसी में सुरक्षाकर्मी का काम कर पत्नि और तीन बच्चों का पालन पोषण करते आ रहा था। उसकी मंझली बेटी श्रेया 7 वर्ष स्थानीय विद्यालय में कक्षा दूसरी की पढ़ाई कर रही थी। वह सोमवार की रात बिस्तर पर सोई हुई थी, इसी दौरान रात करीब तीन बजे उसकी नजर तकिया के करीब एक सांप पर पड़ी। जिसकी जानकारी श्रेया ने अपने माता पिता को दी। उन्होंने देखा तो करैत प्रजाति का सांप तकिया के नीचे छिपा था। उसे किसी तरह बिस्तर से नीचे उतारा किया। तत्पश्चात भोर होते तक श्रेया मोबाइल में खेलते रही। इसी बीच अचानक उसे उल्टी होने लगी। परिजनों ने देखा तो उसके हाथ में सर्पदंश के निशान मिले। परिजन बिना देर किए श्रेया को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटघोरा पहुंचे, जहां डॉक्टर ही नदारद था। डॉक्टर की गैर मौजूदगी में महिला स्वास्थ्य कर्मी ने प्राथमिक उपचार कर पीड़िता को मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया। विडंबना तो यह है कि बालिका को मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाने सरकारी एम्बुलेंस की सेवा मिलने भी दे हुई। वे जब तक पीड़िता को मेघ्डिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचे, हालत बिगड़ चुकी थी। उसने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि यदि सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डॉक्टर उपलब्ध होते और समय पर एम्बुलेंस की सुविधा मिलती तो उनकी बेटी की जान बच सकती थी। बहरहाल मेमों के आधार पर अस्पताल पुलिस ने वैधानिक कार्रवाई पूरी करते हुए वृद्धा व बालिका के शव को परिजनों के सुपुर्द कर दिया है। करैत प्रजाति के सर्प ने श्रेया को डस लिया। सर्प बिस्तर से उतरकर बिल में घुसता, इससे पहले ही उसे पकड़ लिया गया। परिवार ने सर्प को टोकरी में ढंककर रखा था। इसके पीछे सर्प के सही सलामत होने पर मरीज के ठीक होने का अंधविश्वास कारण था। नोवा नेचर के सदस्य जितेंद्र सारथी ने परिजनों को समझाईश दी। उनकी समझाईश पर परिजन सर्प को सुरक्षित स्थान पर छोड़ने राजी हुए।
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