कोरबा। सुबह का समय बच्चों के चेहरों पर टेस्ट देने का उत्साह था। कोई अपनी कॉपी दोहरा रहा था, कोई दोस्तों से सवाल पूछ रहा था, लेकिन जैसे ही स्कूल वाहन मुख्य सड़क पर पहुंचे, उनका उत्साह कुछ ही मिनटों में मायूसी में बदल गया। कुसमुंडा क्षेत्र में लगे भीषण ट्रैफिक जाम ने सैकड़ों स्कूली बच्चों को सड़क पर ही रोक दिया। स्कूल जाने बच्चे मदद की गुहार लगाते रहे। चार्ट पेपर पर स्कूल जाना है मुझे हमारी मदद करो की अपील बच्चे करते रहे। जाम के कारण बच्चे घंटों वाहनों में ही फंसे रहे। जिससे उनका क्लास टेस्ट भी प्रभावित हो गया। सबसे मार्मिक दृश्य तब देखने को मिला जब कुछ बच्चों ने चार्ट पेपर पर मुझे स्कूल जाना है लिखकर विरोध और गुहार व्यक्त की। परीक्षा देने की जल्दी, समय निकलने की चिंता और जाम से निकलने की बेबसी बच्चों के चेहरों पर साफ दिखाई दे रही थी। स्कूली वाहनों में बच्चे बैठे चालकों से पूछते रहे अंकल स्कूल कितनी देर में पहुंचेंगे, लेकिन ड्राइवरों के पास भी कोई जवाब नहीं था। सड़क पर वाहनों की लंबी कतार लगी हुई थी और जाम खुलने के कोई आसार नजर नहीं आ रहे थे। इन दिनों अधिकांश स्कूलों में टेस्ट व मूल्यांकन परीक्षाएं चल रही हैं। ऐसे समय में देर से स्कूल पहुंचने की चिंता ने बच्चों का आत्मविश्वास और उत्साह दोनों कम कर दिया। कई बच्चे पूरे रास्ते बेचैन होकर स्कूल वाहन से बाहर झांकते रहे कि आखिर जाम कब खुलेगा। घर से निकलते ही मुख्य सड़क पर पहले से लगे जाम में स्कूल वैन, ऑटो और निजी वाहन फंस गए। स्कूल वाहनों की संख्या अधिक होने के कारण जाम और भी विकराल हो गया। स्थिति ऐसी थी कि कई किलोमीटर तक वाहन रेंगते रहे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार जब काफी देर तक कोई राहत नहीं मिली तो कुछ जागरूक नागरिक स्वयं आगे आए और यातायात को व्यवस्थित करने का प्रयास किया। इसके बाद धीरे-धीरे जाम खुलना शुरू हुआ और स्कूली बच्चे अपने-अपने विद्यालयों तक पहुंच सके। स्थानीय लोगों का आरोप है कि कुसमुंडा क्षेत्र में रोजाना लगने वाले ट्रैफिक जाम के बावजूद एसईसीएल प्रबंधन और कुसमुंडा पुलिस की ओर से प्रभावी ट्रैफिक व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए पर्याप्त पहल नहीं की जा रही है। इसका खामियाजा सबसे अधिक स्कूली बच्चों, कर्मचारियों और आम नागरिकों को भुगतना पड़ रहा है। स्कूल वाहन ही नहीं जाम में यात्री बस और एम्बुलेंस भी फंसे रहे। इस दौरान कुसमुंडा, दीपका, बांकीमोंगरा, हरदीबाजार की ओर से आने वाले सैंकड़ों लोग इमलीछापर रोड पर परेशान नजर आए। मंगलवार को भारी जाम में बच्चों की स्कूल बस व छोटे वाहन फंस गए। इस दौरान यात्री बस और एम्बुलेंस के फंसे रहने से भी मरीज और यात्री परेशान हुए। हालांकि विश्व हिन्दू परिषद जिलाध्यक्ष के साथ क्षेत्र के युवाओं ने जाम खुलवाने मोर्चा संभाला। दर्जनभर युवाओं ने इमलीछापर चौक से पैदल कुचैना मोड़ से आगे एनटीपीसी पुल के नीचे तक जाम में फंसे हल्के वाहनों को रास्ता बनवाकर बाहर निकाला। भारी वाहनों को व्यवस्थित कर जाम खुलवाया गया। बारिश की वजह से खदान के भीतर जाम और सर्वर की समस्या बढ़ गई है। ऐसे में खदान में प्रवेश करने वाले भारी वाहनों की कतार माइंस के अंदर से बाहर कई किलोमीटर तक लग रही है। कोरबा से कुसमुंडा आने पर इमलीछापर चौक से पहले फोरलेन निर्माण के कारण भारी वाहनों के खड़े होने के लिए पर्याप्त व्यवस्था है, लेकिन इमलीछापर चौक से कुचैना की ओर सड़क सकरी है। लक्ष्मण नाला पर संकरा पुल भी है। यहां एक समय में एक ही ट्रेलर निकल पाता है, जिस वजह से जाम लग रहा है। लोगों का कहना है कि खदान में एंट्री शुरू भी हो जाए तो इमलीछापर चौक स्थित रेलवे फाटक भी घंटों बंद रहता है।
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