कोरबा। सीएसईबी रेलवे फाटक पर एक नहीं बल्कि दो-दो एम्बुलेंस ट्रैफिक जाम में इस तरह फंस गईं कि फाटक खुल भी जाए, तब भी आगे बढ़ने की कोई जगह नहीं थी। सामने वाहनों की लंबी कतार और पीछे भी जाम। सायरन लगातार बजता रहा, लेकिन रास्ता किसी ने नहीं दिया, क्योंकि देने के लिए रास्ता था ही नहीं।
एम्बुलेंस के भीतर मौजूद मरीज के लिए हर गुजरता सेकंड जिंदगी और मौत के बीच का फासला तय कर सकता है। परिजन बेबस होकर घड़ी देखते रहते हैं, चालक बार-बार सायरन बजाता है, लेकिन जब सड़क ही थम जाए तो आखिर जाएं भी तो कहां। यह कोई पहली घटना नहीं है। सीएसईबी रेलवे फाटक और आगे टीपी नगर रेलवे फाटक बंद होने के दौरान अक्सर ऐसी स्थिति बनती है, जब शहर की आवश्यक सेवाएं भी ट्रैफिक के सामने लाचार नजर आती हैं। सबसे बड़ी चिंता की बात यह है कि जिले के अधिकांश बड़े अस्पताल रेलवे फाटक के उस पार स्थित हैं। ऐसे में गंभीर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाना कई बार चुनौती बन जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से इस मार्ग पर रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) या वैकल्पिक बाईपास मार्ग की मांग उठती रही है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान सामने नहीं आया। परिणामस्वरूप हर दिन हजारों लोग जाम से परेशान होते हैं और सबसे अधिक संकट में फंसती हैं एम्बुलेंस जैसी आपातकालीन सेवाएं।
![]()
































