कोरबा। प्रदेश के लगभग 3700 से अधिक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) के वेतनमान को लेकर बुधवार को प्रदेशभर में एक साथ आवाज बुलंद हुई। छत्तीसगढ़ प्रदेश सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी संघ के आह्वान पर सभी जिलों में कार्यरत सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने शांतिपूर्ण रैली निकालकर कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में वेतनमान प्रकरण की मुख्य सचिव स्तर पर उच्चस्तरीय व निष्पक्ष जांच, दोषी अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा भारत सरकार को संशोधित प्रस्ताव तत्काल पुन: भेजने की मांग की गई है। जिले में जिला उपाध्यक्ष प्रीति कुमारी कैवर्त्य की अगुवाई में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर ज्ञापन सौंपा। इस दौरान उन्होंने कहा कि यह आंदोलन किसी व्यक्ति विशेष के विरुद्ध नहीं, बल्कि शासन के अनुमोदित निर्णयों के सम्मान, प्रशासनिक पारदर्शिता, सुशासन तथा हजारों सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए किया जा रहा है। उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री इस गंभीर विषय पर संवेदनशीलता के साथ शीघ्र न्यायोचित निर्णय लेंगे। संघ का आरोप है कि राज्य स्वास्थ्य समिति की शासी निकाय द्वारा वेतनमान पुनर्निर्धारण के लिए विधिवत अनुमोदित प्रस्ताव, स्वास्थ्य मंत्री के निर्देश तथा भारत सरकार के प्रचलित दिशा-निर्देशों के बावजूद भारत सरकार को अलग प्रस्ताव भेजा गया। इसके कारण प्रदेश के हजारों सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी आज भी अपने वैधानिक वेतनमान से वंचित हैं। ज्ञापन में पूरे प्रकरण की मुख्य सचिव स्तर अथवा किसी स्वतंत्र वरिष्ठ अधिकारी से निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई, अनुपूरक पीआईपी के माध्यम से संशोधित प्रस्ताव भारत सरकार को तत्काल भेजने तथा वेतनमान पुनर्निर्धारित कर देय अंतर राशि सहित सभी लाभ प्रदान करने की मांग की गई है। ज्ञापन सौंपने के दौरान ब्लॉक अध्यक्ष मयंक कुमार, महेंद्र कुमार, कुलदीप राजवाड़े, जिला कोषाध्यक्ष आरती कुमारी, सीजीपीएसके के जिला अध्यक्ष मदन चौहान, जिला महामंत्री जयसिंह, जिला सचिव गोवर्धन कंवर, वीरेंद्र कोसले, सुशील मिरी तथा विनय पटेल सहित बड़ी संख्या में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी उपस्थित रहे।
पूर्ववत वेतनमान का भेजा प्रस्ताव
संघ के अनुसार आयुष्मान भारत हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर आपरेशनल गाइडलाइन में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए 25 हजार प्रतिमाह निश्चित मानदेय व कार्य आधारित प्रोत्साहन राशि का प्रावधान है। वहीं वित्तीय वर्ष 2026-27 की वार्षिक कार्ययोजना (पीआईपी) में भी राज्य स्वास्थ्य समिति की शासी निकाय ने वेतनमान पुनर्निर्धारण संबंधी प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। इसके बावजूद भारत सरकार को पूर्ववत वेतनमान का प्रस्ताव भेजे जाने से गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़े हुए हैं। संघ का कहना है कि अभिलेख, शासी निकाय की बैठक के कार्यवृत्त तथा भारत सरकार के रिकॉर्ड ऑफ प्रोसीडिंग्स से यह स्पष्ट होता है कि केंद्र सरकार ने राज्य से प्राप्त प्रस्ताव को ही स्वीकृति प्रदान की। ऐसे में यदि जांच में यह सिद्ध होता है कि अनुमोदित प्रस्ताव के स्थान पर अलग प्रस्ताव भेजा गया, तो यह शासन के निर्णयों की अवहेलना व प्रशासनिक जवाबदेही का गंभीर मामला होगा।
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