कोरबा। राज्य के पेंशनरों की लंबित एवं न्यायोचित मांगों के समर्थन में मुख्यमंत्री को अनुशंसा पत्र प्रेषित किए जाने छत्तीसगढ़ अधिकारी-कर्मचारी पेंशनर्स एसोसिएशन प्रान्तध्यक्ष पी.आर. यादव ने सांसद और विधायक को पत्र लिखा है।
पत्र में श्री यादव ने पत्र में छत्तीसगढ़ शासन के एक लाख से अधिक पेंशनरों एवं परिवार पेंशनरों की न्यायोचित मांगों के संबंध में सांसद व विधायकों का ध्यान आकृष्ट कराया है। उन्होंने कहा कि लंबित महंगाई राहत का नियमित कर्मचारियों के साथ भुगतान किया जाए।छत्तीसगढ़ राज्य के गठन के 25 वर्ष पूर्ण हो चुके हैं, किन्तु पेंशनरों को महंगाई राहत का भुगतान आज भी मध्यप्रदेश शासन की सहमति पर निर्भर है। राज्य पुनर्गठन अधिनियम, 2000 की धारा 49 (6) में केवल पेंशन व्यय के बंटवारे का प्रावधान है, जबकि वर्ष 2006 से दोनों राज्यों के वित्त सचिवों के कार्यपालिकीय आदेश के आधार पर महंगाई राहत के भुगतान को मध्यप्रदेश की सहमति से जोड़ दिया गया। परिणामस्वरूप छत्तीसगढ़ के पेंशनरों को महंगाई राहत का भुगतान नियमित कर्मचारियों के साथ नहीं मिल पाता तथा प्रत्येक वृद्धि में 6 माह या उससे अधिक का अनावश्यक विलंब होता है। पेंशनरों को भी राज्य के नियमित कर्मचारियों एवं केंद्र सरकार के पेंशनरों की भांति देय तिथि से महंगाई राहत प्रदान की जाए। पेंशनरों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना लागू की जाए। राज्य शासन द्वारा कार्यरत कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा की घोषणा की गई है। बढ़ती आयु एवं स्वास्थ्य संबंधी आवश्यकताओं को देखते हुए पेंशनरों एवं परिवार पेंशनरों के लिए भी पृथक कैशलेस चिकित्सा सुविधा योजना शीघ्र लागू की जाए। 80 वर्ष के स्थान पर 70 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर पेंशन में 20 प्रतिशत अतिरिक्त वृद्धि प्रदान की जाए।वर्तमान में 20 प्रतिशत अतिरिक्त पेंशन का लाभ 80 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर दिया जाता है। जबकि राष्ट्रीय सांख्यिकी से प्राप्त औसत जीवन प्रत्याशा को देखते हुए यह लाभ 70 वर्ष की आयु से दिया जाना अधिक न्यायसंगत एवं व्यावहारिक होगा। पत्र में कहा है कि छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के आदेश का पालन करते हुए छठवें एवं सातवें वेतनमान के एरियर का भुगतान किया जाए। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय बिलासपुर के द्वारा पारित आदेश के अनुसार छठवें वेतनमान के 32 माह तथा सातवें वेतनमान के 27 माह के एरियर का भुगतान निर्धारित अवधि में किया जाना है। न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए शीघ्र भुगतान सुनिश्चित किया जाए। पेंशनरों को मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना में शामिल किया जाए। राज्य के अनेक पेंशनरों को अत्यंत सीमित पेंशन प्राप्त होती है, जिससे वे अपनी धार्मिक आस्था के अनुरूप तीर्थयात्रा करने में असमर्थ हैं। उन्हें भी मुख्यमंत्री तीर्थ यात्रा योजना का लाभ प्रदान किया जाए। राज्य पेंशनर्स कल्याण मंडल का पुनर्गठन लंबे समय से लंबित है तथा इसकी नियमित बैठकें भी आयोजित नहीं हो रही हैं। अतः मंडल का शीघ्र पुनर्गठन कर नियमित बैठकें आयोजित करने हेतु संबंधित विभागों को निर्देशित किया जाए। प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों में पेंशनर्स भवन (सियान सदन) के निर्माण पर कार्यवाही की जाए। उक्त मांगों का समर्थन करते हुए मुख्यमंत्री को अपनी अनुशंसा प्रेषित करने की मांग सांसद व विधायकों से की है।
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