कोरबा। छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (पीएससी) की राज्य सेवा परीक्षा-2025 में मुख्य परीक्षा के परिणाम और मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर पूर्व मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता जयसिंह अग्रवाल ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि एक ही प्रश्न के सही और गलत उत्तर देने वाले अभ्यर्थियों को समान अंक दिए गए हैं, जबकि कुछ मामलों में गलत उत्तर देने वाले अभ्यर्थी को सही उत्तर देने वाले से अधिक अंक मिले हैं। उन्होंने सरकार और आयोग से मामले का निराकरण होने तक साक्षात्कार स्थगित करने की मांग की है।
प्रेस वार्ता में जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने यूपीएससी की तर्ज पर पीएससी परीक्षा आयोजित करने का वादा किया था, लेकिन पिछले दो वर्षों की परीक्षाओं में लगातार गड़बड़ियों के आरोप सामने आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि राज्य सेवा परीक्षा-2025 में कुल 265 पद हैं। निर्धारित 1:3 के अनुपात के अनुसार 795 अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना चाहिए था, लेकिन केवल 608 अभ्यर्थी ही उत्तीर्ण होकर साक्षात्कार तक पहुंचे हैं। आयोग का कहना है कि शेष 187 अभ्यर्थी न्यूनतम अंक हासिल नहीं कर सके। उन्होंने आयोग से मांग की कि वह यह प्रमाणित करे कि इन 187 अभ्यर्थियों ने न्यूनतम अंक हासिल नहीं किए। पूर्व मंत्री ने 2024 की मुख्य परीक्षा की दो उत्तर पुस्तिकाओं का हवाला देते हुए मूल्यांकन में कथित गड़बड़ी के उदाहरण प्रस्तुत किए। उनके अनुसार प्रश्न क्रमांक 5(1) में दोनों अभ्यर्थियों के उत्तर सही और समान होने के बावजूद एक को 2 में से शून्य तथा दूसरे को 2 में 2 अंक दिए गए। इसी तरह भक्तिन माता-राजिम से संबंधित उत्तर में एक अभ्यर्थी को सही उत्तर लिखने पर 8 में से 3.5 अंक मिले, जबकि दूसरे अभ्यर्थी ने कथित रूप से गलत उत्तर लिखने के बावजूद 1.5 अंक प्राप्त किए। छत्तीसगढ़ में होमरूल लीग की स्थापना संबंधी प्रश्न में भी एक अभ्यर्थी को सही उत्तर के लिए 4 में से 2.5 अंक मिले, जबकि दूसरे के अलग और गलत उत्तर होने के बावजूद उसे भी 2.5 अंक दिए गए।
उन्होंने घरेलू हिंसा से व्यथित व्यक्ति संबंधी प्रश्न का उदाहरण देते हुए कहा कि एक अभ्यर्थी ने गलत उत्तर दिया, फिर भी उसे 2 में से 0.5 अंक मिले, जबकि सही उत्तर देने वाले अभ्यर्थी को भी 0.5 अंक ही मिले। इसी प्रकार बौद्ध धर्म के महाभिनिष्क्रमण संबंधी सही उत्तर पर दो अभ्यर्थियों को क्रमशः 0.5 और 1.5 अंक दिए जाने का दावा किया गया।जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि राज्य सरकार और पीएससी को अभ्यर्थियों की शंकाओं का समाधान पारदर्शी तरीके से करना चाहिए। उन्होंने सभी उत्तर पुस्तिकाओं के पुनर्मूल्यांकन और साक्षात्कार के लिए 1:3 के अनुपात का पालन किए जाने की मांग की। प्रेस वार्ता में जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष मनोज चौहान, जिला कांग्रेस शहर अध्यक्ष मुकेश राठौर सहित कांग्रेस के अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
उत्तर पुस्तिकाएं साक्षात्कार से पहले उपलब्ध कराने की मांग
जयसिंह अग्रवाल ने कहा कि अभ्यर्थियों को अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की जांच देखने का अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने मांग की कि साक्षात्कार से पहले सभी अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं सार्वजनिक अथवा उपलब्ध कराई जाएं, ताकि अभ्यर्थी स्वयं देख सकें कि उनकी कॉपियों का मूल्यांकन सही ढंग से हुआ है या नहीं। उन्होंने यह भी मांग रखी कि साक्षात्कार के लिए चयनित अभ्यर्थियों को छोड़कर शेष सभी अभ्यर्थियों की उत्तर पुस्तिकाएं उन्हें निःशुल्क उपलब्ध कराई जाएं। साथ ही मूल्यांकनकर्ताओं की योग्यता और चयन के लिए स्पष्ट मानदंड निर्धारित करने तथा पीएससी मुख्य परीक्षा के लिए मॉडल उत्तर जारी करने की मांग की।
2024 के परिणाम पर भी उठाए सवाल
पूर्व मंत्री ने कहा कि राज्य सेवा परीक्षा-2024 में भी मुख्य परीक्षा के बाद साक्षात्कार के लिए निर्धारित 1:3 अनुपात से 95 अभ्यर्थी कम लिए गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि उस समय भी नियमों का पालन नहीं किया गया।उन्होंने 2024 की परीक्षा में उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन को लेकर भी सवाल उठाते हुए कहा कि कथित तौर पर शिक्षक एलबी से कॉपियां जांच कराई गईं तथा मूल्यांकनकर्ताओं के नाम और नंबर सार्वजनिक होने की बात भी सामने आई थी। उन्होंने कहा कि परीक्षा की गोपनीयता और पारदर्शिता बनाए रखने के लिए जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
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