कोरबा। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को किसानों की आर्थिक सुरक्षा का कवच माना जाता है, लेकिन जिले में इस योजना की स्थिति बेहद चिंताजनक है। इस खरीफ सीजन में जिले के केवल 9889 किसानों ने ही अपनी फसलों का बीमा कराया है। विडंबना यह है कि पिछले वर्ष इसी अवधि में करीब 23,000 किसानों ने बीमा कराया था। यानी एक साल के भीतर बीमा कराने वाले किसानों की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है।
बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई निर्धारित थी। ऐसे में कृषि विभाग के अधिकारी ज्यादा से ज्यादा किसानों को योजना से जोड़ने का प्रयास करते रहे, लेकिन किसान रुचि नहीं ले रहे हैं। योजना के आवेदन की मियाद खत्म होने के कुछ घंटे पहले तक जिले के 9889 किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा के तहत अपनी फसल का बीमा कर लिया था। पिछले बार 23000 किसानों का बीमा किया गया था। कृषि भी एक तरह का उद्योग है. किसी भी तरह के नुकसान और रिस्क से बचने के लिए जोखिम की भरपाई के लिए बीमा महत्वपूर्ण है। किसानों को हर हाल में बीमा कराना चाहिए। जिले में सहकारी समितियों में कुल पंजीकृत किसानों की संख्या लगभग 55,000 है। यदि भूमिहीन व सीमांत किसानों को भी शामिल कर लिया जाए, तो यह आंकड़ा लगभग डेढ़ लाख तक पहुंच जाता है। इसके बावजूद, इतनी बड़ी संख्या में अन्नदाता इस महत्वपूर्ण योजना से जुड़ने से कतरा रहे हैं। कई बार जागरूकता के अभाव में भी किसान इस योजना से दूर रह जाते हैं, तो कुछ किसान बीमा की जटिलताएं और क्लेम मिलने में होने वाली देरी से भी योजना से दूरी बनाते हैं।
इस तरह मिलता है बीमा का क्लेम
योजना के तहत बुवाई से लेकर खड़ी फसल और कटाई के बाद खेत में सूखने के लिए रखी गई फसल जिसकी अधिकतम अवधि 14 दिनों तक है, उसे कवर किया जाता है। सूखा, बाढ़, जलभराव, चक्रवात, ओलावृष्टि, भूस्खलन और आकाशीय बिजली गिरना के अलावा ओलावृष्टि, भूस्खलन और जलभराव के कारण होने वाला स्थानीय नुकसान बीमा के दायरे में आता है।
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