कोरबा। मौसम में लगातार हो रहे बदलाव, हल्की वर्षा के बाद बढ़ी उमस और दूषित पानी के कारण जिले में मौसमी बीमारियां बढ़ने लगी हैं। इसका सबसे बड़ा असर जिला मेडिकल कालेज अस्पताल के अलावा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में देखने को मिल रहा है। मेडिकल कालेज अस्पताल में मरीजों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि महिला और पुरुष वार्ड पूरी तरह भर चुके हैं। स्थिति यह है कि अस्पताल प्रबंधन को वार्ड के बाहर भी अतिरिक्त बेड लगाने पड़े हैं। पिछले एक सप्ताह के दौरान अस्पताल की ओपीडी में 4,342 मरीज इलाज के लिए पहुंचे, जो पिछले सप्ताह की तुलना में 1,321 अधिक हैं। मरीजों की लगातार बढ़ती संख्या ने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव डाल दिया है। अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों में बच्चों और बुजुर्गों के साथ बड़ी संख्या में युवा भी शामिल हैं। अधिकांश मरीज सर्दी-जुकाम, वायरल बुखार, फ्लू, उल्टी-दस्त और मलेरिया जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं। चिकित्सकों के अनुसार वर्षा के बाद बढ़ी उमस, दूषित पेयजल और अनियमित खान-पान संक्रमण फैलने के प्रमुख कारण हैं। ओपीडी काउंटरों पर सुबह से ही मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं। अस्पताल के 50-50 बेड वाले महिला और पुरुष वार्ड पूरी तरह भर चुके हैं। ट्रामा भवन में भी मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए पिछले दो दिनों में पुरुष वार्ड में आठ और महिला वार्ड में छह अतिरिक्त बेड लगाए गए हैं। जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में भी मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। अधिकांश केंद्रों में बेड भर जाने के कारण मरीजों को जिला मेडिकल कालेज अस्पताल रेफर किया जा रहा है। इससे जिला अस्पताल पर अतिरिक्त दबाव बन गया है। मौसमी बीमारियों के बढ़ते प्रकोप के बावजूद ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य शिविरों का अभाव बना हुआ है। कई प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में पदस्थ डाक्टर और स्टाफ नर्स परिसर में निवास नहीं करते और शहर से आना-जाना करते हैं। रात के समय आपातकालीन स्थिति में मरीजों को जिला अस्पताल तक पहुंचना पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि वषार्काल में जलजनित रोगों का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में पेयजल स्रोतों का समय पर क्लोरीनीकरण नहीं होने से संक्रमण का जोखिम और बढ़ रहा है।
इन कारणों से बढ़ रही हैं मौसमी बीमारियां
0 रुक-रुक कर हो रही बारिश में भीगना।
0 दूषित पानी का सेवन।
0 खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों का सेवन।
0 संक्रमित मरीजों के संपर्क में आने पर सावधानी नहीं बरतना।
0 बासी भोजन का सेवन।
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