कोरबा। सुदूर वनांचल क्षेत्र में स्थित रपता विमलता में मलेरिया ने पांव पसार लिया है। स्वास्थ्य अमले ने बीमारी की रोकथाम के लिए गांव मे ही डेरा डाल दिया है। टीम घर घर जाकर संदिग्ध मरीजों की जांच कर रही है। टीम की जांच में 41 मलेरिया पीड़ित सामने आए हैं, जिनका उपचार किया जा रहा है। इसके अलावा गंभीर मरीजों को सघन इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। मुख्य चिकित्सा व स्वास्थ्य अधिकारी ने गांव पहुंचकर हालात का जायजा लेते हुए जरूरी दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। मानसून के सक्रिय होते ही संक्रामक व मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। ,जिसके मद्देनजर स्वास्थ्य विभाग ने पहले ही कमर कस ली थी। सीएमएचओ डॉ. एसएन केसरी के निर्देश पर क्षेत्र में नजर रखी जा रही है। इन तमाम सावधानियों के बीच सुदूर वनांचल क्षेत्र में स्थित गांव रपता व विमलता में मलेरियों ने कहर बरपाना शुरू कर दिया। गांव में मलेरिया से पीड़ित 41 मरीज मिले हैं। यह खबर सामने आते विभागीय अफसर अलर्ट मोड पर आ गए हैं। सीएमएचओ के निर्देश टीम की तैनाती कर दी गई है, जो 24 घंटे गांव में ही डेरा डाले हुए हैं। उनके द्वारा घर घर जाकर रैपिड सर्वे किया जा रहा है। इस दौरान बुखार से पीड़ित मरीजों का स्लाइड तैयार किया जा रहा है, ताकि मलेरिया पीड़ित की पहचान हो सके। टीम सामान्य बुखार से पीड़ित और संदिग्ध मरीज का गांव में ही उपचार कर रही है, जबकि मलेरिया के गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। गुरूवार को भी एक गंभीर मरीज को सघन उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज अस्पताल दाखिल कराया गया है। गांव में मलेरिया पीड़ितों के उपचार में किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए पर्याप्त मात्रा में दवा का भंडारण किया गया है। सीएमएचओ डॉ: केसरी के अलावा जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. कुमार पुष्पेश, डीपीओ पदमाकर शिंदे, बीएमओ डॉ. दीपक राज व बीपीएम व्यास कोसले गांव पहुंचे। सीएमएचओ ने मलेरिया प्रभावित गांव का निरीक्षण किया। इस दौरान मलेरिया नियंत्रण के लिए टीम द्वारा किए जा रहे कार्य के अलावा रैपिड फीवर सर्वे, संदिग्ध मरीजों की कीट से जांच, स्लाइड संग्रहण, दवा की उपलब्धता तथा लार्वा नियंत्रण संबंधी गतिविधियों की समीक्षा की। उन्होंने प्रत्येक बुखार पीड़ित तथा परिवार के सदस्यों का जांच व उपचार व मलेरिया प्रभावित क्षेत्र में स्थिति सामान्य होने तक नियमित निगरानी के निर्देश जारी किए हैं।सीएमएचओ डॉ. केसरी ने कहा है कि बुखार आने पर स्वयं दवा लेने के बजाय निकटतम स्वास्थ्य केंद्र में मलेरिया की जांच कराएं। अस्पतालों में जांच की सुविधा व दवा उपलब्ध कराए गए हैं। मादा एनाफिलिज मच्छर के काटने से मलेरिया का खतरा रहता है। इससे बचने रात में सोते समय मच्छरदारी का उपयोग करें। घर के आसपास पानी जमा न होनें दें। पानी की टंकी व बर्तन को ढंककर रखें। पूरी बांह के कपड़े पहनें। उन्होंने कहा है कि समय पर जांच, उपचार और जनसहभागिता से मलेरिया पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।
श्यांग मेें संजीवनी एक्सप्रेस की तैनाती
जिला मुख्यालय से श्यांग की दूरी करीब 70 किलोमीटर है। श्यांग के आसपास रपता व विमलता सहित कई ऐसे गांव है, जो सर्वाधिक मलेरिया प्रभावित गांवों में शामिल हैं। सुदूर वनांचल क्षेत्र मे बसे होने के कारण मलेरिया सहित किसी भी बीमारी से पीड़ित मरीज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के बाद जिला अस्पताल तक लाने भारी मशक्कत करनी पड़ती है। रपता विमलता में मलेरिया का प्रकोप बढ़ने के बाद सीएमएचओ ने श्यांग स्थित स्वास्थ्य केंद्र में 108 संजीवनी एक्सप्रेस की तैनाती कर दी है, ताकि मरीज को तत्काल हायर सेंटर भिजवाया जा सके।
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