कोरबा। विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों को पक्की छत मुहैया कराने के उद्देश्य से शुरू की गई पीएम जनमन योजना के आवास निर्माण में ठेकेदारी प्रथा हावी होने का मामला सामने आया है। कोरबा विकासखंड के ग्राम पंचायत नकिया में चार पहाड़ी कोरवा हितग्राहियों से आवास निर्माण के नाम पर 6 लाख 40 हजार रुपए लेने के बावजूद एक साल बाद भी निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया गया। विभागीय निरीक्षण में तीन आवास रूफ कास्ट और एक आवास प्लिंथ लेवल पर मिला। मामले को गंभीरता से लेते हुए जनपद पंचायत ने संबंधित व्यक्ति को अंतिम चेतावनी नोटिस जारी किया है।
ग्राम नकिया निवासी बंधन राम, मनियारी बाई, जगत राम और सिंधू राम के नाम वर्ष 2023-24 में पीएम जनमन योजना के तहत आवास स्वीकृत हुए थे। योजना के तहत जनपद पंचायत की आवास शाखा ने हितग्राहियों के खातों में निर्माण की राशि अंतरित की थी। नियमानुसार हितग्राहियों को इसी राशि से अपने आवास का निर्माण कराना था, लेकिन आरोप है कि गांव के ही रामप्रसाद ने आवास बनाने की जिम्मेदारी लेते हुए उनसे रकम ले ली।
विभागीय टीम ने जब आवास निर्माण की स्थिति का निरीक्षण किया तो हकीकत सामने आई। तीन आवास रूफ कास्ट तक और एक आवास महज प्लिंथ लेवल तक बना मिला। हितग्राहियों से पूछताछ में रामप्रसाद द्वारा रकम लेने की जानकारी सामने आई। बताया गया कि तीन हितग्राहियों से कुल 5 लाख 40 हजार रुपए तथा एक अन्य हितग्राही से 1 लाख रुपए लिए गए हैं। रकम लिए करीब एक साल बीतने के बावजूद आवास अधूरे हैं। विभाग की ओर से निर्माण पूरा कराने के लिए रामप्रसाद को दो बार नोटिस जारी किया जा चुका है। इसके बावजूद निर्माण में अपेक्षित प्रगति नहीं हुई। अगस्त तक काम पूरा करने का आश्वासन दिए जाने के बाद भी आवास अधूरे ही रहे।
तीन दिन में जवाब नहीं तो एफआईआर
लगातार निर्देशों की अनदेखी के बाद जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी ने अब अंतिम चेतावनी नोटिस जारी किया है। 7 सितंबर को जारी नोटिस में तीन दिनों के भीतर कार्यालय में उपस्थित होकर स्पष्टीकरण देने कहा गया है। नोटिस में स्पष्ट किया गया है कि जवाब संतोषजनक नहीं मिलने पर लेमरू थाने में एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जाएगी।
नोटिस के बाद शिकायतों का दौर
पीएम जनमन योजना में हितग्राहियों से राशि लेने के बाद आवास अधूरा छोडऩे का यह पहला मामला नहीं बताया जा रहा है। विशेष पिछड़ी जनजाति परिवारों के लिए संचालित योजना में निर्माण कार्यों को लेकर पहले भी ठेकेदारी प्रथा पर सवाल उठते रहे हैं। इधर, रामप्रसाद को अंतिम नोटिस जारी होने के बाद शिकायतों का दौर भी शुरू हो गया है। सूत्रों के अनुसार जनपद कार्यालय से नोटिस जारी होने के दो दिन बाद एक संगठन ने शिकायत कर कुछ अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। अब प्रशासनिक जांच में यह भी स्पष्ट होगा कि हितग्राहियों की राशि किसके माध्यम से और किन परिस्थितियों में निर्माण कार्य के लिए ली गई तथा आवास अधूरे रहने के लिए जिम्मेदारी किसकी है।
![]()
































